Web Hosting क्या हैं और ये कैसे काम करती हैं ?

दोस्तों आप सभी का स्वागत है, आपके अपने ब्लॉग दोस्त4U में,  हम सभी को जब भी कुछ खोजना होता हैं तो इंटरनेट का प्रयोग करते हैं, पर इंटरनेट पर यह सभी कंटेंट आता कहां से है, और यह कहां Store/ Host रहता हैं।

वेब होस्टिंग क्या हैं, वेब होस्टिंग कैसे काम करती हैं। इसके बारे मैं कभी-कभी हमारे मन में यह विचार अवश्य आया  होगा। आपके मन में उठने वाले सभी विचारों का निराकरण चाहते हैं या अपना कोई ब्लॉग या  ऑनलाइन व्यवसाय  चलाना चाहते हैं, तो आज की पोस्ट आपके लिए बहुत ही लाभदायक होने वाली हैं। आज की पोस्ट पढ़ने के बाद आपको वेब होस्टिंग की पूरी जानकारी हो जाएगी।

होस्टिंग क्या है (Web hosting kya hai)

Web Hosting क्या है

कोई वेबसाइट बनाई जाती है तो उसमें  बहुत सी फाइलों, चित्रों, वीडियोस, आदि का इस्तेमाल किया जाता है। हमारे द्वारा बनाई यह वेबसाइट क्योकि हमारे लैपटॉप पर स्टोर है। इसलिए इसे केवल हमारे ही द्वारा एक्सेस की जा सकता है।

पर यदि हम यह चाहते हैं, कि हमारी इस वेबसाइट को दुनिया में किसी के भी द्वारा और कहीं भी एक्सेस किया जा सके देखा जा सके, तो हमें इसे ऐसे कंप्यूटर में स्टोर करना पड़ेगा जो 24×7 दिन इंटरनेट से कनेक्टेड रहे तथा जिसका प्रोसेसर, रैम और Storage  बहुत अच्छी हो। 

इसके लिए हमें इस तरह की सुविधा उपलब्ध कराने वाली कंपनियों में स्थित Storage centre (Server)  पर अपना space  लेकर वहां अपनी वेबसाइट को अपलोड करना होगा। यही अपनी वेबसाइट का डाटा स्टोर करना ही Web  Hosting कहलाता है।

दोस्तों इस प्रक्रिया को हम उदाहरण के द्वारा समझने का प्रयास करेंगे। मान लिया क्या आप एक मेडिकल स्टोर खोलना चाहते हैं,  तो इसके लिए सबसे पहले हमें एक नाम की आवश्यकता होती हैं। जिस नाम से  हम अपनी दुकान खोलना चाहते हैं जैसे कि जैन मेडिकल स्टोर (दोस्त फॉर यू) फिर उसका रजिस्ट्रेशन कराना होगा। वर्चुअल दुनिया में से इसे डोमेन नेम खरीदना कहते है। 

उसके बाद जिस प्रकार हमें अपनी दवाइयों को रखने के लिए एक दुकान की आवश्यकता होती है। ठीक उसी प्रकार अपने कंटेंट को रखने के लिए हमें एक डाटा स्टोर की आवश्यकता होती है। जिसे इंटरनेट की दुनियां में वेब  होस्टिंग कहा जाता है। 

जैसे हम दुकान का किराया मासिक किया वार्षिक आधार पर चुकाते हैं, वैसे ही हमें होस्टिंग कंपनी को अपने कंटेंट को  होस्ट करने के लिए मासिक या वार्षिक आधार पर कुछ चार्जेज देने होते हैं। 

जिस प्रकार दुकान का किराया उसके लोकेशन पर निर्धारित होता है। उसी प्रकार  होस्टिंग का चार्ज इस बात पर निर्भर  करता है कि हम होस्टिंग कंपनी से किस प्रकार की सुविधा चाहते हैं। 

Hosting की आवश्यकता क्यों पड़ती है ?

जैसे कि अभी ऊपर बताया कि Hosting एक प्रकार की डाटा स्टोरेज सुविधा हैं, तो हमारे मन में एक प्रश्न उठता है क्या हम अपने कंप्यूटर पर डाटा store रख कर उसे पूरी दुनिया में एक्सेस क्यों नहीं करा सकते। 

 यदि हमारे पास बहुत ही अधिक उच्च क्षमता वाला कंप्यूटर डिवाइस है, जो 24×7 इंटरनेट से  कनेक्टेड रह सके तथा उसमें वह सभी सॉफ्टवेयर चल सके जो एक  Hosting प्रोवाइडर कंपनी के कंप्यूटर में होते हैं, तो निश्चित रूप से हम अपने कंप्यूटर डिवाइस को होस्टिंग सर्वर बना सकते हैं। 

 लेकिन दोस्तों यह बहुत ही एक्सपेंसिव प्रोजेक्ट, जिसमें बहुत ही अधिक धन और बहुत ही अधिक  स्किल्ड स्टाफ की आवश्यकता होती है। 

इसीलिए सभी लोग अपना सरवर बनाने के स्थान पर होस्टिंग प्रोवाइडर कंपनी से होस्टिंग सर्विसेज लेना अधिक पसंद करते हैं। 

web hosting kya hai

वेब होस्टिंग कैसे काम करती है

जब भी कोई विजिटर किसी वेब ब्राउज़र (Google Chrome, Mozilla firefox, Bing, Yahoo…. ) पर क्वेरी डालता है, तो वह ब्राउज़र इंटरनेट के माध्यम से वह क्वारी संबंधित सरवर तक पहुंचाता है, जहां वह फाइल स्टोर रहती है वहां से वह फाइल इंटरनेट के माध्यम से विजिटर के कंप्यूटर तक पहुंचती है। 

 वेब होस्टिंग कितने प्रकार की होती है:

Operating system के आधार पर Hosting दो प्रकार की होती है।  

  1. Window Hosting
  2. Linux Hosting

1 .Window Hosting – हम जानते हैं कि अपनी फाइल डिस्प्ले करने के लिए फाइल का किसी कंप्यूटर में स्टोर करना आवश्यक है, लेकिन कंप्यूटर बिना ऑपरेटिंग सिस्टम के चल नहीं सकता। 

अतः यदि हम अपनी फाइल किसी ऐसे कंप्यूटर में स्टोर करना चाहते हैं, जिसका ऑपरेटिंग सिस्टम विंडोज आधारित हो तो वह होस्टिंग विंडोज होस्टिंग कहलाती है। 

क्योंकि विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम माइक्रोसॉफ्ट का पेटेंट ऑपरेटिंग सिस्टम है। अतः उसका यूज़ करने के लिए माइक्रोसॉफ्ट चार्ज वसूल करता है। जिससे होस्टिंग सर्विसेज प्रोवाइडर करने वाली कंपनियों की cost बढ़ जाती हैं।इसीलिए विंडोज होस्टिंग Costly पड़ती है। 

2. Linux Hosting : जैसे कि मोबाइल का एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम ओपन सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम हैं। उसी  प्रकार लाइनेक्स भी एक ओपन सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम है। इसके लिए होस्टिंग प्रोवाइडर कंपनी को कोई चार्ज नहीं देना पड़ता। इसीलिए  इस प्रकार की होस्टिंग विंडो -होस्टिंग के मुकाबले काफी सस्ती पड़ती है, इसीलिए Linax hosting काफी पॉपुलर भी है। अधिकतर वेबसाइट लाइनेक्स होस्टिंग पर ही होस्ट होती हैं।  

web hosting kya hai

 लाइनेक्स  होस्टिंग कितने प्रकार के होते हैं-

सपोर्ट और सर्विसिस के आधार पर होस्टिंग मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है-

1 . शेयर्ड होस्टिंग-

जब बहुत सारी वेबसाइट एक ही सर्वर पर होस्ट होकर उसके रिसोर्सेज (प्रोसेसर, सीपीयू, रैम) को सम्मिलित रूप में इस्तेमाल करती है, तो यह Hosting शेयर्ड होस्टिंग कहलाती है। इस प्रकार की  होस्टिंग में एक समस्या यह आती है, कि यदि किसी भी वेबसाइट पर अचानक  यूजर बढ़ जाये तो उस सर्वर पर लोड आ जाता है। उस सर्वर पर अपलोडेड सभी वेबसाइट स्लो हो जाती है। 

2- वीपीएस होस्टिंग- 

इसका शाब्दिक अर्थ वर्चुअल प्राइवेट सर्वर। जब किसी सरवर को वर्चुअल रूप में विभाजित कर दिया जाता है। जिसका  प्रत्येक भाग एक अलग सर्वर का कार्य करता है। उसके प्रत्येक भाग में एक वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाती है, तो इस प्रकार की वेब होस्टिंग  वीपीएस होस्टिंग कहलाती है। 

मान लिया एक सर्वर 10 जीबी रैम  100 जीबी भी डिस्क स्पेस रखता है और उसे पांच वर्चुअल सर्वर में डिवाइड करके  प्रत्येक को 2GB रैम वह 20 जीबी डिस्क स्पेस दे दी जाती है।प्रत्येक वर्चुअल सर्वर पर एक वेबसाइट अपलोड कर दी जाती हैं। 

अब यदि किसी एक वेबसाइट पर अचानक लोड बढ़ने पर कोई समस्या होती हैं तो दूसरे सर्वर पर अपलोडेड वेबसाइट पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता। 

3.- डेडीकेट होस्टिंग:

जब पूरा का पूरा एक सर्वर पर एक ही वेबसाइट होस्ट होती है, इसमें उस सर्वर का पूरा सपोर्ट उस वेबसाइट के साथ होता हैं। उसे डेडीकेटेड  होस्टिंग कहते हैं।

इस प्रकार की होस्टिंग का प्रयोग केवल बड़ी-बड़ी कंपनियों जैसे ऐमेज़ॉन अलिबाबा फेसबुक द्वारा ही किया जाता है। जिस पर एक ही समय में  कितने ही विजिटर आ जाएं पर उनका सर्वर शायद ही कभी डाउन होता। 

क्योंकि पूरे सर्वर पर एक ही वेबसाइट अपलोड होती है। इसीलिए इस प्रकार के सरवर की होस्टिंग के लिए charges बहुत अधिक होते है और केवल बड़ी -2 कंपनियां ही इन्हें afford कर पाती हैं।

इन तीनों प्रकार की होस्टिंग के अंतर के बारे में एक उदाहरण द्वारा समझने का प्रयास करते हैं-

मान लिया आप एक विद्यार्थी हैं और आप पढ़ने के लिए किसी दूसरे शहर जाते हैं। वहां पर आपको रहने के लिए आपके पास तीन विकल्प होते हैं,

पहला विकल्प आप एक कमरा किराए पर लेकर उसमें तीन-चार दूसरे स्टूडेंट के साथ रूम शेयर कर सकते हैं। इसे होस्टिंग की दुनिया में शेयर होस्टिंग कहते हैं।

दूसरा विकल्प आप एक कमरा किराए पर ले सकते हैं। जिसमे यदि आपका कोई मित्र आपके पास आ जाये तो वो भी बिना परेशानी की एडजेस्ट हो सकता होस्टिंग की दुनिया में इसे VPS Hosting कहते हैं। 

तीसरा विकल्प आप कुछ पूरे मकान को किराए पर ले सकते, तो उस मकान सारे के सारे  रिसोर्सेज आपके लिए होते हैं अब आपके पास कुछ लोग भी आ जाएं तो कोई परेशानी नहीं होगी। यह डेडीकेटेड होस्टिंग का उदाहरण हैं। 

मुख्य रूप से तो तीन प्रकार की होस्टिंग ही होती हैं। लेकिन जब आप किसी होस्टिंग प्रोवाइडर की साइट पर जायेंगे तो वहां दो अन्य प्रकार की होस्टिंग रिसेलर होस्टिंग और क्लाउड होस्टिंग का भी ऐड मिलेगा। आइये जानते है ये क्या होती हैं –

रीसेलर होस्टिंग

जैसे की नाम से ही पता चलता है, रीसेल होने वाली  होस्टिंग . यह होस्टिंग वह कंपनियां लेती हैं जो अपना होस्टिंग प्रोवाइडर का व्यवसाय करना चाहती हैं,  पर उनके पास  इतना धन और टेक्निकल  स्टाफ नहीं होता कि वह अपना खुद का सर्वर  स्थापित कर सकें तो वे कंपनियां किसी बड़े होस्टिंग प्रोवाइडर से रीसेलर होस्टिंग लेकर अपना hosting व्यवसाय शुरू करती हैं। इसमें वे रीसेलर होस्टिंग के स्पेस के छोटे-छोटे पार्ट करके उसमें वेबसाइट होस्ट कर देती हैं।

रीसेलर होस्टिंग वह  शेयर होस्टिंग में अंतर यह है, कि रीसेलर होस्टिंग प्रत्येक वेबसाइट के लिए एक अलग अलग C-Panel दिया जा सकता है, लेकिन  शेयर होस्टिंग में होस्टेड सभी वेबसाइट के लिए केवल एक ही सीपैनल होता है। 

 क्लाउड होस्टिंग

इस प्रकार के Hosting  में कई सारे सर्वरों को मिलाकर एक ग्रुप बना दिया जाता है। यह सर्वर पूरे विश्व में अलग-अलग स्थानों पर होते हैं। ये एक दूसरे से जुड़े रहते हैं। इस प्रकार के सर्वर को क्लाउड सर्वर कहा जाता है तथा इनमें ली जाने वाली होस्टिंग क्लाउड होस्टिंग कहलाती है। 

आज के समय में क्लाउड होस्टिंग सबसे अच्छी मानी जाती है। इसमें आपका डाटा सभी सर्वरों पर सेव रहता है। अब यदि कोई यूजर आपकी वेबसाइट को सर्च करता है तो सर्च इंजन इंटरनेट के माध्यम से उस यूजर के निकटतम क्लाउड होस्टिंग का जो भी सर्वर होगा, उससे कनेक्ट कर वह फाइल यूजर के कंप्यूटर पर दिखा देता है। जिससे वेब पेज यूजर के कंप्यूटर पर जल्दी Show होता है। 

इसका एक फायदा यह भी है, यदि कभी आपका निकटतम सर्वर डाउन भी हो जाये तो भी वह दूसरे निकटतम सर्वर से संपर्क कर; आपकी फाइल को यूज़र कंप्यूटर तक पहुंचा देता है।

क्लाउड होस्टिंग बहुत फास्ट और  सुरक्षित है इसीलिए आजकल क्लाउड होस्टिंग को अधिक पसंद किया जा रहा है

होस्टिंग खरीदते समय  किन किन सावधानियों को रखना चाहिए

होस्टिंग मार्केट में बहुत सारे होस्टिंग प्लान  उपलब्ध है।  जिन्हें देखकर हम परेशान हो जाते हैं की कौन सा होस्टिंग प्लान  खरीदें। होस्टिंग प्लान लेते समय हम निम्न पैरामीटर को ध्यान में रख सकते हैं ?

1- डिस्क स्पेस- होस्टिंग प्रोवाइडर हमें कितनी कैपेसिटी की स्टोरेज दे रहा है- 500 GB  / एक T.B,   यहां यदि हमें अनलिमिटेड डाटा स्टोरेज क्षमता,  कोई प्रोवाइडर दे रहा हो तो हमें उसके साथ जाना चाहिए। इससे हमें कभी स्टोरेज फुल होने की खतरा नहीं रहेगा।  

इसमें एक बात का ध्यान रखना चाहिए स्टोरेज डिस्क HDD है या SSD है। 

हमें SSD स्टोरेज देने वाली कंपनी को ही चुनना चाहिए क्योंकि SSD का ट्रांसफर रेट HDD हार्ड डिस्क बहुत अधिक होता है। जिससे स्टोर फाइल बहुत जल्दी ट्रांसफर होती हैं। 

2- बैंडविथ-  बैंडविथ का अर्थ है कि आपकी वेबसाइट प्रति सेकंड कितना डाटा एक्सेस करती है। उसे उस सर्वर की बैंडविथ कहा जाता है।  यदि आपकी वेबसाइट पर कभी बहुत अधिक यूजर एक्सेस कर रहे हो और आप का प्लान कम बेड विथ का है तो आपकी वेबसाइट  जाएगी स्लो हो जाएगी या बंद हो जाएगी।  इसलिए यदि कोई होस्टिंग प्रोवाइडर अनलिमिटेड बैंडविड्थ दे रहे हो तो हमें उस प्लान के साथ जाना चाहिए।

3- अप टाइम- हमारी वेबसाइट कितने समय तक  उपलब्ध (Online ) रहती है। वह उसका अप टाइम कहलाता है, क्योंकि आजकल कंपटीशन का जमाना है। इसलिए  लगभग सभी  होस्टिंग प्रोवाइडर कंपनियां 99.99 प्रतिशत का  गारंटीड अप टाइम दे रही हैं। 

4- डोमेन होस्टिंग की सुविधा – यह देखना चाहिए कि  हम जिस होस्टिंग प्रोवाइडर से होस्टिंग ले रहे हैं।  वह हमें C-Panel में कितने डोमेन जोड़ने की  करने की  सुविधा दे रहा हैं। यदि कोई हमें अनलिमिटेड डोमेन ऐड करने की अनुमति दे रहा है, तो हमें उस होस्टिंग प्रोवाइडर के साथ जाना चाहिए। 

इसके साथ ही यदि कोई होस्टिंग प्रोवाइडर हमें SSL सर्टिफिकेट फ्री में उपलब्ध करा रहा हूं तो उसे चुनने का एक यह भी एक कारण होना चाहिए।  

कुछ प्रमुख होस्टिंग प्रोवाइडर कंपनियां-

भारत में वैसे तो बहुत से कंपनियां होस्टिंग कंपनिया होस्टिंग प्रोवाइड कराती हैं। जिनमे से कुछ प्रमुख कंपनियां निम्न प्रकार से हैं।

BlueHost, HwakHost, Hostgator, Hostinger, Godaddy, A2Hosting, etc

आज हमने क्या सीखा- 🙂

दोस्तों आज की पोस्ट में हमने सीखा कि होस्टिंग क्या होती, होस्टिंग कैसे कार्य करती हैं, होस्टिंग कितने प्रकार की होती हैं और होस्टिंग खरीदते समय हमें किन -किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

मुझे विश्वास हैं की आपको होस्टिंग के बारे में अब कोई संशय नहीं रह गया होगा। मेरा हमेशा ही यह प्रयास रहता है कि जिस विषय से सम्बंधित पोस्ट लिखी जाये। उसकी पूर्ण जानकारी उस आर्टिकल में विस्तृत रूप में दे दी जाये। जिससे कि कोई ओर रेफरेंस देखने की आवश्यकता ही न पड़े। फिर भी आपको होस्टिंग के बारे में कुछ पूछना हो तो कमेंट द्वारा आप हमसे जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

 

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