असम्भव को संभव में बदलने वाली लड़की की सफलता की कहानी |Wilma Rudolph in hindi

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असम्भव को संभव में बदलने वाली लड़की की सफलता की कहानी /Wilma Rudolph in hindi

Wilma Rudolph in hindi.ये कहानी हैं एक ऐसी लड़की की जिसने अपनी अदम्य जिजीविषा और दृढ इच्छा शक्ति से मेडिकल साइंस और डॉक्टरों के कथन को झूठा साबित कर दिया ये कहानी हैं ऐसी लड़की की जो बिना सहारे के चल नही सकती थी पर वह अपनी इच्छा शक्ति के बल पर उठकर चली बल्कि विश्व की सबसे तेज धाविका बनीजी हाँ  दोस्तों ये कहानी है लिविंग लीजेंड विल्मा रुडोल्फ की

विल्मा रुडोल्फ का जन्म 23 जून 1940 को अमेरिका के टेनसी प्रान्त के एक अश्वेत परिवार में  प्रीमेच्योर बच्चे के रूप में हुआ था विलमा अपने माता पिता की 19 वी संतान थी ये एक पिछड़ा हुआ इलाका था जहाँ मूलभूत सुविधाएँ नाम मात्र को थीये  वे दौर था जब अश्वेतों को दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता था विल्मा रुडोल्फ के पिता कुली का कार्य करते थे जबकि उनकी माँ लोगों के घरों में नौकरानी की तरह कार्य करती थी

जब विल्मा ढाई वर्ष की थी तो वो पोलियों वायरस से ग्रस्त हो गई उसके दोनों पैर ख़राब हो गए उसकी माँ इससे बहुत चिन्तित हो गई पर वह एक बहादुर महिला थी उसने हार नहीं मानी उनके घर से 50 मील की दूरी पर एक अस्पताल था, उसने विल्मा को वहां दिखायावहाँ के डॉक्टरों ने विल्मा  का इलाज उस समय जो भी चिकित्सीय खोज थी उसके आधार पर किया और उसके पैरों की मालिश करने को बताया। विल्मा की माँ प्रति सप्ताह उसे अस्पताल ले जाती और बाकी दिनों में उसका मालिश व अन्य घरेलू उपचार करती

अपनी माँ के द्वारा किये गये अथक प्रयासों से और 5 वर्षो के के लगातार इलाज से विल्मा ब्रेसिस पहनकर चलने लगीअब विल्मा धीरे -धीरे बड़ी हो रही थी तो उसकी माँ ने उसे एक स्थानीय विद्ध्यालय में प्रवेश दिला दिया विद्ध्यालय में जब बच्चे दौड़ते और खेलते तो विल्मा का मन भी उनके जैसा करने को करता । तब विल्मा का इलाज कर रहे डॉक्टर के.एमवे  ने उसे बास्केट बाल खेलने के लिए खेलने के लिए सलाह दी

अब विल्मा 11 वर्ष की हो चुकी थी वो ब्रेसिस के साथ नही खेलना चाहती थी क्योकि उसके साथ न तो वो तेज दौड़ पाती और ठीक से खेल पाती थी एक दिन उसने वे ब्रेसिस उतार कर फेक दिए और अपनी माँ से कहा में इन्हें अब कभी नहीं पहनूगीउसने ब्रेसिस के बिना चलने का प्रयास किया पर गिर पड़ी और चोट लग गई वो फिर उठी फिर गिर गई अपनी माँ के उत्साह वर्धन से तथा अपनी मजबूत इच्छा शक्ति से वो कुछ दिनों में चलने लगी जब ये बात विल्मा का इलाज कर रहे डॉक्टर को पता चला तो वो विल्मा से मिलने आये और उन्होंने विल्मा को दौड़ने के लिए कहा विल्मा कुछ दूर तक दौड़ी और गिर पड़ी डॉक्टर ने दौड़ कर उसे उठा लिया और गले लगा कर बोले -‘बेटी तुमने मुझे गलत साबित कर दिया, तुम दौड़ोगी और तुम सभी को पीछे छोड़ दोगी डॉक्टर द्वारा कहे इन शब्दों ने जैसे उसके अन्दर एक ऐसी उर्जा का संचार कर दिया जो जीवन पर्यंत उसके लिए प्रेरणा स्रोत का कार्य करती रही

15 वर्ष की आयु में विल्मा ने टेनसी राज्य के विश्व विद्यालय में प्रवेश लिया यह इनकी मुलाकात कोच टेम्पल से हुई कोच टेम्पल से विल्मा ने अपनी इच्छा जाहिर की, कि वह दुनियां की सबसे तेज धावक बनना चाहती हूँ कोच टेम्पल विल्मा की दृढ इच्छा शक्ति को देखते हुए उसे ट्रेनिंग देने को तैयार हो गए उसके बाद विल्मा ने Inter university दौड़ में हिस्सा लिया  और आखिरी स्थान पर रही  विल्मा को लगातार 8 दौड़ प्रतियोगिता में हार का सामना करना पड़ा लेकिन अपनी हर हार के बाद वो दुबारा दो गुनी ताकत से खड़ी हुई और आख़िरकार  9 वी प्रतियोगिता में वह प्रथम स्थान पर आई

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1960 में विल्मा को ओलंपिक में खेलने का अवसर मिला ओलंपिक में अपनी पहली ही दौड़ 100 मी की दौड़ में विल्मा ने उस समय की सबसे तेज धाविका जुता हेन का हराया और गोल्ड मैडल प्राप्त किया उसके बाद तो विल्मा ने 2०० मी दौड़ में जुता हेन को पराजित किया 4०० मी0 रिले दौड़ में विल्मा का मुकाबला एक बार फिर जुता हेन से हुआ  रिले दौड़ में सबसे तेज धावक सबसे बाद में दौड़ता हैं जब विल्मा की बारी आयी तो विल्मा की साथी खिलाडी ने जो बेटन विल्मा को दी वह उससे छूट कर गिर गई इतने में जुता हेन आगे निकल गई विल्मा ने रूककर बेटन उठाई और बिजली की तेजी से दौड़ते हुए जुता हेन को पीछे छोड़ दिया और इस प्रकार तीसरा गोल्ड मैडल भी विल्मा की टीम को मिला

विल्मा पहली अमरीकी अश्वेत खिलाडी थी जिसे 3 स्वर्ण पदक मिले उसके बाद तो जैसे उसनेअश्वेत खिलाडियों के लिए ओलंपिक खेलों के लिए दरवाजे ही खोल दिये विल्मा रुडोल्फ अखबारों में ब्लैक गेज़ल के नाम से छा गई 

तो Dosto देखा किस प्रकार एक अपाहिज लड़की ने सुविधाओं के अभाव का रोना ना रोते हुए भी सफलता के शिखर तक पहुँची जबकि हम सब कुछ होते हुए भी बिना कठिन संघर्ष किये हुए हार मान लेते हैं  Dosto संघर्ष ही जीवन का दूसरा नाम हैं ।मुझे पूरी उम्मीद हैं आप इस Real life hero से प्रेरणा लेकर अपने लक्ष्य प्राप्ति तक संघर्ष करते रहेंगे और तब तक नहीं रुकेगे जब तक कि आप अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर लेते 

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