पंचक क्या हैं ,पंचक में क्या कार्य नहीं करने चाहिए | What is Panchak in hindi

0
393 views

what is panchak in hindi

पंचक क्या हैं ,पंचक में क्या कार्य नहीं करने चाहिए | What is Panchak in hindi

दोस्तों हम सभी ने कभी न कभी घर पर पंचक का नाम अवश्य सुना होगा|अब पंचक लग गए हैं अब अमुक काम नही हो सकता | यदि अमुक काम किया तो अशुभ होगा| तो हमारे अन्दर कौतुहल जागता है की ये पंचक क्या है | तो दोस्तों आज हम आपको बताते पंचक क्या है और पंचक में हमें क्या- क्या सावधानी बरतनी चाहिए |

नक्षत्रों के मेल से बनने वाले विशेष योग को पंचक कहा जाता है। जब चन्द्रमा, कुंभ और मीन राशि पर रहता है, तब उस समय को पंचक कहते हैं।ये योग अशुभ होता हैं |

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पांच नक्षत्रों को पंचक की श्रेणी में रखा गया है।ये नक्षत्र हैं – धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र| इन पांच नक्षत्रों को पंचक कहा गया है।

ऐसा शास्त्रों में उल्लेखित है कि इन नक्षत्रों में कोई भी काम किया जायेगा तो उस काम को पांच बार पुनः करेंगे। इसलिए पंचक के नक्षत्रों में अशुभ काम को करना वर्जित है।

पंचक की ध्यान रखने योग्य बातें

(1) घनिष्ठा नक्षत्र के दौरान  घास, लकड़ी आदि ईंधन एकत्रित नहीं करना चाहिए, इससे अग्नि का भय रहता है।पंचक में किसी की मृत्यु होने से और पंचक में शव का अंतिम संस्कार करने से उस कुटुंब या निकटजनों में पांच मृत्यु और हो जाती है।

(2) शतभिषा में काम करने से घर में तनाव का वातावरण रहेगा।

(3)पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में अशुभ काम करने से घर में रोग बना रहता है।

(4)उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में अशुभ कर्म करने से आर्थिक दण्ड व सामाजिक अपमान होने की आशंका रहती है

(5) रेवती नक्षत्र में अशुभ कार्य करने से धन हानि तथा दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। पंचक के दौरान जब रेवती नक्षत्र चल रहा हो, उस समय घर की छत नहीं बनाना चाहिए, ऐसा विद्वानों का मत है। इससे धन हानि और घर में क्लेश होता है।

अन्य सावधानियां 

 (1) पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है। इन नक्षत्रों में दक्षिण दिशा की यात्रा करना हानिकारक माना गया है।
(2) पंचक में पलंग बनवाना भी बड़े संकट को न्यौता देना है।

(3) पंचक में शव का अंतिम संस्कार नही करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि पंचक में शव का अन्तिम संस्कार करने से उस कुटुंब में पांच मृत्यु और हो जाती है।यदि परिस्थितीवश किसी व्यक्ति की मृत्यु पंचक अवधि में हो जाती है, तो शव के साथ पांच पुतले आटे या कुश (एक प्रकार की घास) से बनाकर अर्थी पर रखें और इन पांचों का भी शव की तरह पूर्ण विधि-विधान से अंतिम संस्कार करें, तो पंचक दोष समाप्त हो जाता है। ऐसा गरुड़ पुराण में लिखा है।

उज्जैन के ज्योतिषी पं. विनय भट्ट के अनुसार पंचक में आने वाले नक्षत्रों में शुभ कार्य हो सकते हैं। पंचक में आने वाला उत्तराभाद्रपद नक्षत्र वार के साथ मिलकर सर्वार्थसिद्धि योग बनाता है, वहीं धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र यात्रा, व्यापार, मुंडन आदि शुभ कार्यों में श्रेष्ठ माने गए हैं।

पं. भट्ट के अनुसार पंचक को भले ही अशुभ माना जाता है, लेकिन इस दौरान सगाई, विवाह आदि शुभ कार्य भी किए जाते हैं। पंचक में आने वाले तीन नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद व रेवती रविवार को होने से आनंद आदि 28 योगों में से 3 शुभ योग बनाते हैं, ये शुभ योग इस प्रकार हैं- चर, स्थिर व प्रवर्ध। इन शुभ योगों से सफलता व धन लाभ का विचार किया जाता है।

—————————————————————

दोस्तों यदि आपके पास  पंचक क्या हैं ,पंचक क्या कार्य नहीं करने चाहिए | What is Panchak in hindi  में ओर जानकारी हैं, या हमारे द्वारा दी गई जानकारी में कुछ त्रुटी लगे या कोई सुझाव हो तो comment करके सुझाव हमें अवश्य दें |हम इस पोस्ट को update करते रहेंगें |

दोस्तों यदि आपको हमारी पोस्ट अच्छी लगी हो तो उसे like और share अवश्य करें |

धन्यवाद 🙂

अवश्य पढ़े

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here