Three Moral stories in hindi for all

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Three Moral Stories 

थोड़ी देर का स्वाद जीवन भर की परेशानी 

एक शहद व्यापारी अपने ग्राहक को शहद दे रहा था | अचानक व्यापारी के हाथ से शहद का बर्तन छुटकर गिर गया और उसका ढक्कन खुलने की वजह से बहुत सारा शहद नीचे गिर गया |व्यापारी ने ऊपर -ऊपर से जितना शहद उठा सकता था उठा लिया, लेकिन फिर भी बहुत सारा शहद नीचे गिरा पड़ा रहा |

बहुत सारी मक्खियाँ शहद के लालच में वहाँ आ गयी और शहद चाटने लगी |मीठा -मीठा शहद उन्हें इतना अच्छा लगा कि वे एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर जल्दी -जल्दी चाटने लगी | जल्दी ही उनका पेट भर गया |जब मक्खियों का पेट भर गया तो उन्होंने उड़ना चाहा लेकिन उनके पंख शहद में चिपक गये थे इसलिए वे उड़ नहीं पा रही थी | वे उड़ने की जितनी भी कोशिश करती उनके पंख उतने ही शहद में चिपक जाते |

इस प्रकार बहुत से मक्खियाँ शहद में लोट -पोट होकर मर गई और बहुत से मक्खियाँ वहाँ पंख चिपकने से छटपटाती रही फिर भी नई मक्खियाँ वहाँ आती शहद के लोभ से शहद खाती और थोड़ी देर में उनकी भी हालत ऐसी ही हो जाती या तो वे  भी वहाँ पंख चिपक कर तड़फ -तड़फ कर मर जाती | पर शहद खाने का मोह नहीं छोड़ पाती |

मक्खियों की इस हालत को देखकर व्यापारी बोला – ‘जो लोग जीभ के स्वाद के लोभ में पड़ जाते है वे भी इन मक्खियों के समान मुर्ख होते हैं | जीभ के थोड़ी देर के  स्वाद के लिए वे अपना स्वास्थ्य ख़राब कर लेते हैं और फिर रोगी बनकर  छटपटाते हैं | शीघ्र ही मृत्यु के ग्रास बनते हैं |

शिक्षा:- जो व्यक्ति थोड़ी देर के जीभ के स्वाद के लालच में पड़ जाते हैं वे अपना स्वास्थ्य ख़राब कर रोगी बनकर छटपटाते हैं और अपने धन व् समय को फिर से स्वास्थ्य को प्राप्त करने में खर्च करते हैं |लेकिन फिर से स्वास्थ्य प्राप्त करने की सम्भावना फिर भी कम रहती हैं |

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संगति का असर 

एक किसान चिडियों से बहुत परेशान था |उसका खेत जंगल के पास था | उस जंगल में बहुत से पक्षी थे | किसान जैसे ही खेत में बीज बोकर घर जाता | पक्षियों का झुण्ड आकर मिटटी कुरेद कुरेद कर बीज खा जाता | वह पक्षियों को उडाता जैसे ही वह खेत से हटता पक्षियों का झुण्ड फिर वहाँ आ जाता | इससे किसान बहुत परेशान था|

एक बार जब किसान जब बहुत परेशान हो गया तो वह एक बड़ा जाल ले आया |उसने पूरे खेत पर जाल बिछा दिया | बहुत से पक्षी बीज चुगने आये वे सभी उसमें फँस गये | उन  पक्षियों के झुण्ड में एक सारस का पक्षी भी जाल में फँस गया |

जब किसान खेत पर उन पक्षियों को पकड़ने के लिए आया तो उस सारस ने किसान से प्रार्थना कि – ‘मुझे छोड़ दीजिये मैंने आपके खेत को कोई नुकसान नहीं पहुचाया हैं | मैं बीज खाने वाला पक्षी नहीं हूँ बल्कि खेत को नुकसान पहुँचाने वाले कीड़ों को खाता हूँ| इसलिए मुझे छोड़ दीजिये |’  

किसान पक्षियों से इतना क्रोधित था | वह बोला चाहे तुम ठीक कहते हों लेकिन तुम आज इन चिड़ियों के साथ पकडे गये हों जो मेरे बीज खा जाये करते थी | इसलिए तुम भी इनके साथ दंड भुगतो |

शिक्षा :- जो जिस प्रकार के लोगों के साथ रहता हैं उसे भी ऐसा ही समझा जाता है | बुरे लोंगो के साथ रहने वालों को भी दंड और अपयश का भागी बनना पड़ता हैं |

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किसान की पत्नी और नेवला

एक किसान ने एक नेवला पाल रक्खा था | किसान और उसकी पत्नी उस नेवले से बहुत प्यार करते थे | नेवला भी बहुत होशियार व् स्वामिभक्त था |एक दिन किसान खेत पर गया और किसान की पत्नी अपने छोटे बच्चे को दूध पिलाकर पालने में लिटाकर पानी भरने के लिए घड़ा लेकर कुँए पर चली गई |

किसान की स्त्री के चले जाने पर एक सांप कहीं से घर में घुस आया और बच्चे के पालने की ओर चलने लगा | नेवले को खतरा महसूस हुआ तो नेवला सांप से लड़ बैठा | उनके बीच काफी देर तक लड़ाई होती रही  और अंत में नेवले ने सांप को मार डाला | नेवला किसान के पुत्र की जान बचाकर बहुत खुस हुआ और वह इसी खुसी में किसान की पत्नी का दरवाजे पर इंतजार करने लगा |

किसान की स्त्री जब पानी का भरा घड़ा लेकर घर पर पहुंची तो उसने नेवले के मुंह पर लगा रक्त देखा | उसने सोचा की नेवले ने उसके पुत्र को काट लिया हैं और क्रोध से पागल हो गई | उसने पानी से भरा घड़ा नेवले के उपर फैक दिया | नेवला घड़े के नीचे कुचलकर मर गया |

जब वह घर के अन्दर पहुंची तो उसने देखा की उसका पुत्र तो शांति से सो रहा है पर पालने के पास एक खतरनाक सांप कटा पड़ा हैं |स्त्री को अपनी भूल का पता चल गया | वह बहुत दुखी हुई और मरे हुए नेवले को गोद में लेकर रोने लगी | लेकिन अब पछताने से क्या फायदा |

शिक्षा :- इसलिए Dosto क्रोध में कोई भी निर्णय लेने से पहले सोच विचार करें नहीं तो बाद में पछताना पड़ता | जल्द बाजी में कोई कदम न उठाये |

बिना बिचारे जो करैं , सो पाछे पछताए |

काम बिगारे आपनो , जग में होत हँसाय ||

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