स्लीप डिसऑर्डर : कारण,लक्षण और उपचार

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स्लीप डिसऑर्डर/Sleep Disorder

दोस्तों नींद कम आना या नींद न आना स्लीप डिसऑर्डर होता हैं| इससे अगला दिन आलस व्  उबासी लेते हुए बीतता हैं एक अच्छी नींद शरीर के लिए एक दवा की तरह होती हैं जो दिन भर में होने वाली थकान व् शारीरिक पीड़ा को दूर कर शरीर को फिर से अगले दिन को शुरू करने के लिए एक नई उर्जा देती हैं |

दोस्तों ये एक ऐसी बीमारी हैं जिसका प्रत्यक्ष रूप से तो हम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता दिखाई देता लेकिन इसका लगातार अनदेखा करना हमारे जीवन पर दूरगामी प्रभाव डालता हैं |अंततः स्लीप डिसऑर्डर हमारे लिए मृत्यु का कारण भी बन सकता हैं |

स्लीप डिसऑर्डर का शरीर पर प्रभाव –

स्लीप डिसऑर्डर के कारण हमारे शरीर को डायबिटीज ,मोटापा ,ब्लड प्रेशर,कब्ज , याददाश्त कम होना व् हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियाँ हमारे शरीर को घेर लेती हैं |

स्लीप डिसऑर्डर के प्रथम प्रभाव के रूप मे हमारी आँखों के नीचे काले – काले गड्ढे व् झाइयाँ पड़ जाती हैं | एंग्जाईटी डिसऑर्डर( छोटी -छोटी बातों पर चिंता करना ) भी स्लीप डिसऑर्डर के कारण होता हैं |

 

स्लीप डिसऑर्डर के प्रमुख लक्षण  –

स्लीप डिसऑर्डर के प्रमुख लक्षणों में दिन में नींद के झटके आना, वाहन चलाते समय नींद के झटके लगना ,रात्रि में बेड पर जाने पर देर तक नींद न आना, रात्रि में नींद का बार-बार टूटना , रात्रि में बार-बार उठना, नींद  में बार – बार पैर मारना, नींद में बडबडाना , नींद में चलना,खर्राटे लेना, छोटी -छोटी बातों पर चिंता करना आदि स्लीप डिसऑर्डर के प्रमुख लक्षण हैं |

स्लीप डिसऑर्डर के प्रमुख कारण –

○ रात्रि में देर से भोजन करना |

○ रात्रि में देर तक जागना|

○ शरीर भारी होना|

○ चाय व् काफी का ज्यादा सेवन |

○ अकेलापन

○ टीवी व् कंप्यूटर का अधिक इस्तेमाल करना |

○ शराब व् सिगरेट का अत्यधिक इस्तेमाल करना |

स्लीप डिसऑर्डर के प्रमुख प्रकार –

विभिन्न प्रकार के स्लीपिंग डिसऑर्डर के आधार पर उन्हें हम विभन्न श्रेणियों में वर्गीकृत कर सकते हैं |

(1 )सिरकेडीयन  रिदम स्लीप डिसऑर्डर  –

इस डिसऑर्डर का प्रमुख लक्षण सोने के समय जागना और जागने के समय सोना हैं |इससे मुख्यतः प्रभावित होने वाले वो लोग हैं जो रात्रि की शिफ्ट में नौकरी करते हैं जैसे- लम्बी दूरी तक सफ़र करने वाले ड्राईवर,विमान चालक, नर्स आदि

इस डिसऑर्डर से ग्रसित व्यक्ति काम पर न होने की दशा में भी नींद न आ पाने से परेशान रहते हैं |

(2 )डिलेड स्लीप डिसऑर्डर  –

इस  सिड्रोम से प्रभावित व्यक्ति देर से सोकर उठता हैं और धीरे -धीरे शरीर इसका आदि हो जाता हैं |

(3 ) स्लीप एपनिया  –

जिन लोगों को सोते समय साँस लेने की समस्या होती हैं वे इससे प्रभावित हो जाते हैं वे ठीक से सो नहीं पाते  हैं |उनकी नींद बार-बार टूट जाती है ओर अगले दिन शरीर टूटा हुआ और थका हुआ रहता हैं | इसकी प्रमुख वजह नांक में मांस का बढ़ जाना हैं |

(4 ) इन्सोमेनियां –

जब नींद न आने की समस्या लम्बे समय तक रहती हैं तो वो विकार इंसोमेनिया की श्रेणी में आता हैं ये समस्या 2- 3 सप्ताह से महीनों तक रह सकती हैं |

(5 ) हाइपर सोमनिया –

इस विकार से पीड़ित व्यक्ति को थोड़ी-थोड़ी देर में नींद की झपकी आती रहती हैं |

स्लीप डिसऑर्डर से  बचने के उपाय  –

○ चाय, काफी और एल्कोहल से का सेवन कम से कम करें |

○ रात्रि का भोजन सोने से 2-3 घंटे पहले कर ले |

○ नियत समय पर सोने के लिए जाये |

○ बिस्तर पर जाने के बाद यदि 15 मिनट तक नींद न आये तो बिस्तर छोड़ दे और स्वम को किसी अन्य कार्य में व्यस्त कर लें |

○ रात्रि में नियत समय पर सोने का प्रयास करें व् देर रात्रि तक न जागे|

○ दिन में न सोयें |

○ रात्रि में सोते समय कोई किताब पढ़ सकते हैं पर 2-3 पेज पढ़ते ही नींद आ जानी चाहिए |

○ आप चाहे तो रात्रि में सोते समय गर्म पानी से नहा सकते हैं इससे मास- पेशियाँ  रिलेक्स महसूस करेंगी |

○ रात्रि में सोने से पहले दिमाग को विचार शून्य करने का प्रयास करें |

○ यदि दिमाग उत्तेजित अवस्था में हैं तो नींद नहीं आएगी |

○ बिस्तर ऐसी जगह लगा हो जहाँ तेज रौशनी न आती हो और शोरगुल न हों |

अन्य उपाय

○ रात्रि में सोते समय अपने सिर और पैरो की अच्छी तरह से मालिश करें |

○ नींद के लिए अच्छा संगीत धीमे आवाज में  सुन सकते हैं |

○ अच्छी नींद के लिए आप शवासन,वज्रासन,व् भ्रामरी प्राणायाम का भी दैनिक  अभ्यास कर सकते हैं |

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