सिस्क्थ सेंस क्या हैं और हम इसे कैसे जाग्रत कर सकते हैं | Six Sense in hindi

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सिस्क्थ सेंस क्या हैं और हम इसे कैसे जाग्रत कर सकते हैं | Six Sense in hindi

हम सभी ने अपने जीवन में कभी न कभी इस शक्ति को महसूस क्या होगा |जब कभी दूर रह रहे अपने सगे संबधी के साथ कुछ बुरा होता हैं तो हमें उसका आभास हो जाता है |हमारा मन विचलित हो जाता हैं | कही न कहीं कुछ बुरा हुआ है |लेकिन हम अपने कार्यो की व्यस्तता में इन बातों को गंभीरता से नही लेते और अपनी दैनिक दिनचर्या में व्यस्त हो जाते हैं |जब बाद में उस घटना के बारे में पता चलता हैं तो महसूस होता हैं कि इस वजह से हमारा मन उस दिन विचलित था |

ठीक इसी प्रकार हमारे आस पास ऐसी घटनाएं यदा कदा होती रहती हैं, जब मरने वाले को अपनी मृत्यु का आभास हो जाता हैं |वह जाने-अनजाने में इस बात का जिक्र अपने परिवार जनों या मित्रों के सामने कर देता हैं |दोस्तों इस तरह का आभास खासकर वृद्ध लोगों को अवश्य हो जाता हैं जो मृत्यु के करीब होते हैं |भविष्य में होने वाली इन घटनाओं के पूर्वाभास को ही सिस्क्थ सेंस (six sense) या अतीन्द्रिय शक्ति कहते हैं |

 सिक्स्थ सेंस 

मस्तिष्क के भीतर कपाल के नीचे एक छिद्र है, उसे ब्रह्मरंध्र कहते हैं, वहीं से सुषुन्मा नाड़ी रीढ़ से होती हुई मूलाधार तक गई है। सुषुन्मा नाड़ी जुड़ी है सहस्रकार से। इड़ा नाड़ी शरीर के बायीं तरफ स्थित है तथा पिंगला नाड़ी दायीं तरफ अर्थात इड़ा नाड़ी में चंद्र स्वर और पिंगला नाड़ी में सूर्य स्वर स्थित रहता है। सुषुम्ना मध्य में स्थित है, अतः जब हमारे दोनों स्वर चलते हैं तो माना जाता है कि सुषम्ना नाड़ी सक्रिय है। इस सक्रियता से ही सिक्स्थ सेंस जाग्रत होता है।

इड़ा, पिंगला और सुषुन्मा के अलावा पूरे शरीर में हजारों नाड़ियाँ होती हैं। उक्त सभी नाड़ियों का शुद्धि और सशक्तिकरण सिर्फ प्राणायाम और आसनों से ही होता है। शुद्धि और सशक्तिकरण के बाद ही उक्त नाड़ियों की शक्ति को जाग्रत किया जा सकता है।

सिक्स्थ सेंस कैसे काम करती हैं 

सिक्स्थ सेंस पूर्णतया एक मानसिक चेतना हैं |जब ये चेतना ब्रह्माण्ड की चेतना से जुड़ जाती हैं तो हमें घटनाओं का पूर्वाभास होने लगता हैं |क्योकि ब्रह्माण्ड की चेतना में भूत, भविष्य और वतर्मान में होने वाली सभी घटनाओं का सार छिपा होता हैं |जब हम अपनी मानसिक चेतना को किसी भी उपाय के द्वारा इतना बढ़ा लेते हैं कि वह ब्रहामंड की चेतना से जुड़ जाये तो हमें भविष्य की होने वाली घटनाओं का आभास होने लगता हैं |हमारी चेतना का स्तर जितना ऊँचा होगा उतनी ही हमें भविष्य की  स्पष्ट जानकारी मिलेगी |

कई उपाय हैं जिनके द्वारा हम अपनी मानसिक चेतन को बढ़ा सकते हैं |

1.सबसे सहज तरीका है मेडिटेशन-

सिक्स्थ सेंस एक्टिव करने का सबसे आसान तरीका मेडिटेशन है। प्रतिदिन एक नियत समय पर मेडिटेशन करने से धीरे-धीरे सिक्स्थ सेंस एक्टिव होने लगता है। जो धीरे -धीरे समय के साथ बढ़ता हुआ काफी उच्च स्तर पर पहुंच जाता हैं|इस उच्च स्तर पर पहुँचने पर धीरे-धीरे आपको भूत-भविष्य व वर्तमान में घटने वाली घटनाओं का आभास पहले ही होने लगेगा।यह तरीका सबसे सुरक्षित व् आसान तरीका हैं जिसे किसी प्रशिक्षक के भी किया जा सकता हैं|

2.त्राटक से –

त्राटक क्रिया से भी इस छठी इंद्री को जाग्रत कर सकते हैं।इसमें किसी एकांत वाले कमरे में बैठ जाये और  एक बिंदु, मोमबत्ती या घी के दीपक की ज्योति पर  बिना बिना पलक झपकाए एकटक देखते रहे |इसके बाद आंखें बंद कर लें| कुछ दिनों के  इसका अभ्यास करने पर|     हमारी एकाग्रता बढ़ने लगेगी जैसे -जैसे एकाग्रता बढ़ेगी  वैसे ही वैसे ही वैसे six sense जाग्रत होने लगेगी|

3.योग व् प्राणायाम के नियमित आभ्यास के द्वारा|

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