शरद पूर्णिमा का महत्व और व्रत कथा| Sharad Purnima  in hindi

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शरद पूर्णिमा का महत्व और व्रत कथा| Sharad Purnima  in hindi

हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहते हैं कहते हैं। ज्‍योतिष के अनुसार, पूरे साल में केवल इसी दिन चन्द्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है।

हिन्दी धर्म में इस दिन के व्रत को कोजागर व्रत या कौमुदी व्रत भी कहते हैं |ऐसी मान्यता हैं कि शरद पूर्णिमा की मध्य रात्रि के बाद मां लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर बैठकर धरती पर आती हैं। माता लक्ष्मी यह देखती हैं कि कौन रात को जागकर उनकी भक्ति कर रहा है। इसलिए शरद पूर्णिमा की रात को ‘कोजागरा’ भी कहा जाता है। ‘कोजागरा’ का मतलब होता है कि कौन जाग रहा है।माँ लक्ष्मी को खीर का प्रसाद चढ़ाया जाता हैं |

शरद पूर्णिमा का महत्व(Importance of Sharad Purnima)- 

ऐसा माना जाता हैं कि इसी दिन  भगवान श्री कृष्ण ने महारास रचाया था।

इस रात्रि को चन्द्रमा की किरणों से अमृत बरसता है|तभी इस दिन उत्तर भारत में खीर बनाकर रात भर चांदनी में रखने का विधान है| शोध के अनुसार खीर को चांदी के पात्र में बनाना चाहिए| चांदी में प्रतिरोधकता अधिक होती है। इससे विषाणु दूर रहते हैं। हल्दी का उपयोग निषिद्ध है। प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम 30 मिनट तक शरद पूर्णिमा का स्नान करना चाहिए। शरद पूर्णिमा की रात में अमृत वर्षा का समय शाम 10 बजे से रात के 12 बजे तक है।

शरद पूर्णिमा व्रत कथा (Sharad Purnima Vrat Katha in Hindi)

एक कथा के अनुसार एक साहूकार के दो पुत्रियां थीं। दोनो पुत्रियां पूर्णिमा का व्रत रखती थीं। लेकिन बड़ी पुत्री  पूरी श्रद्धा से  व्रत रखती थी और छोटी पुत्री अधूरा व्रत करती थी।

कुछ समय बाद दोनों पुत्रियों की शादी हो जाती हैं | छोटी पुत्री की संतान पैदा होते ही मर जाती थी। उसने पंडितों  से इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया की तुम पूर्णिमा का अधूरा व्रत करती थी| जिसके कारण तुम्हारी संतान पैदा होते ही मर जाती है। जब तक तुम पूर्णिमा का व्रत विधिपूर्वक नही रखोगी तब तक तुम्हारी संतान जीवित नहीं रह सकती है।
उसने पंडितों की सलाह पर पूर्णिमा का पूरा व्रत विधिपूर्वक किया। बाद में उसे एक लड़का पैदा हुआ। जो कुछ दिनों बाद ही वह मर गया। उसने लड़के को एक पीढ़े पर लेटा कर ऊपर से कपड़ा ढंक दिया।

फिर वह अपनी बड़ी बहन को बुलाकर लाई और बैठने के लिए वही पीढ़ा दे दिया। बड़ी बहन जब उस पर बैठने लगी जो उसके वस्त्र बच्चे को छू गए। वस्त्र छूते ही बच्चा रोने लगा | तब बड़ी बहन ने कहा कि तुम मुझे कलंक लगाना चाहती थी। मेरे बैठने से यह मर जातातो क्या होता | तब छोटी बहन बोली कि यह तो पहले से मरा हुआ था। तेरे ही भाग्य से यह जीवित हो गया है।

हम दोनों बहनें पूर्णिमा का व्रत करती हैं तू पूरा करती है और मैं अधूरा, जिसके दोष से मेरी संतानें मर जाती हैं। लेकिन तेरे पुण्य से यह बालक जीवित हुआ है। इसके बाद उसने पूरे नगर में ढिंढोरा पिटवा दिया कि आज से सभी पूर्णिमा का पूरा व्रत करें, यह संतान सुख देने वाला है।

शरद पूर्णिमा व्रत विधि(Sharad Purnima Vrat Vidhi) 

-> इस व्रत में हाथी पर बैठे इंद्र और महालक्ष्मी का पूजन करके उपवास रखना चाहिए।

-> रात के समय माता लक्ष्मी के सामने शुद्ध घी का दीया जलाकर फूल आदि से उनकी पूजा करे | इसके बाद 11, 21, या 51 दीपक अपनी इच्छा अनुसार जलाकर मंदिर , बाग-बगीचों व् तुलसी के के पास रखना चाहिए |

->सुबह होने पर स्नान आदि करने के बाद देवराज इंद्र का पूजन कर ब्राह्मणों को खीर का भोजन कराना चाहिए और उन्हें दान दक्षिणा प्रदान करनी चाहिए|

-> लक्ष्मी प्राप्ति के लिए इस व्रत को विशेष रुप से किया जाता है. इस दिन जागरण करने वालों की धन-संपत्ति में वृद्धि होती है|

->रात को चन्द्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही भोजन करना चाहिए|

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