चरक संहिता के रचियता ऋषि चरक के जीवन का प्रेरक प्रसंग

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 चरक संहिता के रचियता ऋषि चरक के जीवन का प्रेरक प्रसंग

Rishi Charak motivational story prerak prsang in hindi
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Rishi Charak motivational story prerak prsang in hindi.ऋषि चरक ने चरक संहिता तो लिख दी पर वैध चरक संहिता का पालन कर भी रहे है या नहीं इस बात का पता लगाने के लिए चरक ने भेष बदलकर चरक संहिता के असली ज्ञान के बारे में पता लगाने के लिए नगर का भ्रमण करने का निर्णय लिया

चरक बूढ़े व्यक्ति का भेष बदलकर नगर के एक प्रसिद्ध वैद्य के यहाँ पहुंचेउस समय वैद्य रोगियों देखने में व्यस्त थे वैद्य का सहयोगी रोगियों द्वारा लाये गए सामान को लेकर रोगियों को वैद्य के पास बारी-बारी से भेज रहा थाजो रोगी कोई सामान नहीं लता उसे बाद में दिखाने के लिए बैठा दिया जाताऋषि चरक भी रोगी बनकर वैद्य के पास पहुंचे और उन्होंने वैद्य से पूछा निरोगी कौन हैं

तब वैद्य ने जवाब दिया निरोगी वह हैं जो नियमित त्रिफला का सेवन करता हैंयह त्रिफला हमारी वैद्यशाला में हमारी देखरेख में बनता हैं ऋषि चरक को उसकी बात सुनकर बहुत ही निराशा हुई और वह बिना कुछ बोले वहां से निकल गए

उसके बाद वे नगर की दूसरी प्रसिद्ध वैद्यशाला में पहुंचे तो वहां की स्थिति भी बिलकुल पहले वाली वैद्यशाला जैसी ही थी उन्होंने उस वैद्य से भी अपना वहीं प्रश्न दोहराया की निरोगी कौन हैं इस वैद्य ने उत्तर दिया कि जो नियमित च्वनप्राश का इस्तेमाल करता है वह ही निरोगी हैंइसके बाद ऋषि चरक ओर कई वैद्यशाला गये पर ऋषि चरक किसी से भी संतुष्ट नहीं हुए

इस प्रकार वे पूछते-पूछते नगर से बाहर पहुँच गए|वे सोचने लगे कि उन्होंने बेकार ही चरक संहिता को लिखावैद्यशालाएं को वैद्धों ने दुकानें बनाकर रख दिया हैं और अपने कर्तव्यों से विमुख हो गए हैंये सोचते-सोचते वे एक नदी के किनारे पहुँच गएवहां एक व्यक्ति नहा रहा था जो देखने में वैद्य लग रहा था ऋषि  चरक ने उससे पूछा क्या आप वैद्य हैं उस व्यक्ति ने जवाब दिया हाँ में वैद्य हूँ

तब ऋषि चरक ने उस व्यक्ति से सवाल पूछा,‘कोरुक ‘? अर्थात निरोगी कौन है

उस व्यक्ति ने जवाब दिया,’हित भूक,मित भूक,ऋत भूक,’अर्थात जो व्यक्ति शरीर के लिए हितकारी भोजन ले, जो भूख से कम खाए , और जो मौसम के अनुसार ही भोजन करेवह व्यक्ति ही निरोगी रह सकता हैं

उस व्यक्ति का जवाब सुनकर ऋषि चरक प्रफुल्लित हो उठे और उसे गले से लगा लिया।क्योकि जिस जवाब को पाने के लिए वो भटक रहे थे वो अन्तोगत्वा मिल ही गया और उनका चरक संहिता लिखने का उद्देश्य भी पूरा हो गया।

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