मानवीय भावनाएं Prerak Prasang Ishvar Chandra Vidyasagar in hindi

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मानवीय भावनाएं Prerak Prasang Ishvar Chandra Vidyasagar in hindi

 मानवीय भावनाएं Prerak Prasang Ishvar Chandra Vidyasagar in hindi
मानवीय भावनाएं Prerak Prasang Ishvar Chandra Vidyasagar in hindi

   Prerak Prasang Ishvar Chandra Vidyasagar in hindi. दोस्तों आज की पोस्ट महान समाज सुधारक ईश्वर चन्द्र विद्यासागर के बारे में है।यह पोस्ट उनके बचपन के एक प्रसंग के रूप में हैंयह बात उस समय की हैं जब ईश्वर चन्द्र विद्यासागर बहुत छोटे थे ईश्वर चन्द्र विद्यासागर अपनी माँ से बहुत ही प्रेम करते थे, और उनकी किसी भी बात नहीं टालते थे

एक दिन वे स्कूल से आने के बाद अपने घर के आँगन में बैठे हुए पढ़ रहे थेतभी किसी ने उनके घर का दरवाजा खटखटायाईश्वर चन्द्र विद्यासागर को उनकी माँ ने आवाज देकर कहा कि दरवाजे पर कौन हैं

जब उन्होंने दरवाजा खोला तो देख की एक बूढी महिला जो फटे-पुराने कपडे पहने हुए थी, और काफी बदहाल थी

उस वृद्ध महिला ने ईश्वर चन्द्र विद्यासागर से कहा कि बेटा मुझे कुछ खाने के लिए दे दो में बहुत भूखी हूँ उस महिला के मुख से बेटा सुनते ही ईश्वर चन्द्र विद्यासागर बहुत भावुक हो गए और तुरंत दौड़कर अपनी माँ के पास पहुंचे

माँ दरवाजे पर एक वृद्ध महिला जो बहुत ही गरीब हैं भूखी है उसे भोजन दे दो

ईश्वर चन्द्र विद्यासागर की माँ ने रसोई से लाकर उस महिला को भोजन करा दिया लेकिन ईश्वर चन्द्र विद्यासागर का मन अब भी उस महिला को देखकर द्रवित था इसलिए उसने  अपनी माँ से आग्रह किया की माँ इन्हें अपने हाथ का एक कंगन दे दो, कंगन सोने का था|जिससे की इस वृद्ध महिला को कुछ दिन भूखा न रहना पड़े

मैं बड़ा होकर आपको दो कंगन बनवा दूंगा। यह सुनकर ईश्वर चन्द्र विद्यासागर की माँ भी भावुक हो गई उन्होंने उस वृद्ध महिला को वह सोने का कंगन दे दियावह वृद्ध महिला उन दोनों को आशीर्वाद देते हुए चली गई

जब ईश्वर चन्द्र विद्यासागर बड़े हुए तो उन्होंने अपनी माँ को एक दिन कहा माँ आज बाजार चलते हैं मैंने आपको जो कंगन देने का वादा किया था वो कंगन आपको दिलवा देता हूँ

यह सुनकर उनकी माँ बोली,’ बेटा मैं तो अब बूढी हो गई हूँ मैं सोने का कंगन लेकर क्या करुँगीमुझे इस उम्र में यह शोभा भी नहीं देगाअगर तुम मुझे कुछ देना ही चाहते हो तो कलकत्ता में गरीब लोगों के इलाज के लिए एक अस्पताल बनवा दो और गरीब बच्चों के लिए एक स्कूल बनवा दो

जिससे गरीबों का इलाज हो सके और जो बच्चे धन के अभाव में स्कूल नहीं जा पातेदिन भर इधर -उधर घूमते रहते हैं उनका जीवन सुधर जायेगा

ईश्वर चन्द्र विद्यासागर ने अपनी माँ की आज्ञा का पालन किया, और आगे चलकर एक महान समाज सुधारक के रूप में प्रसिद्ध हुए

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