पितृ पक्ष ( कनागत ) क्यों मनाया जाता हैं |

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पितृ पक्ष ( कनागत ) क्यों मनाया जाता हैं |

पितृ पक्ष क्यों मनाया जाता हैं इसके पीछे एक पौराणिक कथा हैं | पितृ पक्ष को कनागत  या श्राद के नाम से भी जाना जाता हैं |कनागत शब्द कर्णागत का बिगड़ा हुआ रूप हैं |कर्णागत शब्द कर्ण + आगत से मिलकर बना हैं | ऐसी मान्यता है कि कर्ण कि मृत्यु के पश्चात कर्ण जब यमपुरी पहुचे तो उन्हें खाने के लिए कुछ नहीं मिला | भूख प्यास से व्याकुल होकर वे यमराज के पास पहुंचे और यमराज से प्रार्थना की और बोले मुझे भूख लगी हैं |

तब यमराज बोले, हे कर्ण तुमने जीवन भर सोना ही दान दिया हैं और मनुष्य योनी में आप जो दान करते है वही मरने के पश्चात कई गुना यमपुरी में पाते हैं |इसलिए यहाँ आपके लिए सोना ही सोना हैं भोजन नहीं |

तब कर्ण ने यमराज से 16 दिनों के लिए पृथ्वी पर वापस भेजने का आग्रह किया और इस प्रकार कर्ण ने इन 16 दिनों में भोजन और अन्न का दान किया | तब से 16 दिनों का समय पितृ पक्ष कहा जाने लगा |

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