आलसी ब्राह्मण/ Panchtantra tale lazy brahmin in hindi

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बहुत समय पहले की बात हैं. एक छोटे से गांव में एक आलसी ब्राह्मण रहता था. उसके पास वो सभी कुछ था जो एक परिवार को सुखी रहने के लिए आवश्यक हो.

उसके परिवार में एक सुन्दर पत्नि व दो बुद्धिमान बच्चेऔर एक पालतू कुत्ता  था. उसके पास उपजाऊ जमीन का एक टुकड़ा था.

ब्राह्मण इतना आलसी था कि वह दिन भर चारपाई पर पड़ा सोता रहता था. जबकि अन्य किसान अपने खेतों में काम करते थे.

इससे उसकी पत्नि बहुत दुखी रहती क्योकि ब्राह्मण उसके समझाने के बाद भी नहीं मानता था.

एक दिन एक साधु बाबा ब्राह्मण के घर आया।  ब्राह्मण  ने साधु बाबा का इतना सेवा सत्कार किया कि वे उससे प्रसन्न हो गए .

 साधू बाबा ने खुश होकर कहा कि- ‘ मै तुम्हारे आदर सत्कार से बहुत प्रसन्न  हूं। तुम्हारी कोई एक इच्छा जो तुम मुझसे मांगोगे में उसे पूरी कर दूगां.’

यह सुनकर ब्राह्मण सोच में पड़ गया।

ब्राह्मण ने सोच –समझकर कहा कि- ‘ बाबा मुझे कोई एक ऐसा  व्यक्ति दे दो जो मेरे सभी काम कर दे.

बाबा ने कहा – ‘ तुम्हारे पास उसके लिए हमेशा कोई न कोई काम रहना चाहये.’

इस पर ब्राह्मण ने अपनी सहमति दे दी। तब बाबा ने “तथास्तु” कहा।

यह कहकर साधु बाबा चले गए। उनके जाते ही एक जिन्न वहां प्रकट हो गयाऔर बोला – मेरे मालिक मुझे काम दो नहीं तो मै तुम्हें खा जाऊँगा ‘.

ब्राह्मण ने जिन्न को काम बताया वो काम जिन्न ने पल भर में कर दिया. अब ब्राह्मण जो भी काम बताता वह जिन्न तुरंत पूरा कर देता।

ब्राह्मण के पास जब बताने के लिए कोई काम नहीं रहा तो वह डर गया और रोने लगा।

जब उसकी पत्नि ने यह देखा तो उसने कहा कि- ‘देखा आलस्य का नतीजा, ‘ अब यही आलस्य ही आप की  जान का दुश्मन बन गया हैं।

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अब ब्राह्मण पश्चात्ताप करने लगा और उसने अपनी पत्नि से वादा किया कि अब वह कभी आलस्य नहीं करेगा।

तब ब्राह्मण की पत्नि ने उसके कान में कहा कि जिन्न से अपने पालतू कुत्ते की पूंछ सीधी करने को कहो.

ब्राह्मण ने ऐसा ही किया। जिन्न कुत्ते की पूंछ सीधी नहीं कर पाया , जिन्न ने ब्राह्मण से माफ़ी मांगी  तब ब्राह्मण ने उसे वापस जाने के लिए कह दिया.

इसके बाद ब्राह्मण मेहनत से कार्य करने लगा और ब्राह्मण का परिवार सुख पूर्वक जीवन व्यतीत करने लगा।

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