विद्या की रेखा नहीं थी फिर भी बना ……..

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panani-hindi-short-story-with-moral/विद्या की रेखा नहीं थी फिर भी बना संस्कृत का प्रख्यात विद्वान् 

एक बालक को उसके पिताजी ने शिक्षा के लिए गुरुकुल भेजा | बालक वहा रहकरअध्ययन करने लगा | एक दिन गुरूजी ने उसे एक पाठ याद करने के लिए दिया |

उस बालक ने बहुत प्रयास किया, लेकिन उसे पाठ याद नहीं हो पाया |गुरूजी ने पूरी कक्षा से प्रश्न पूछे सभी ने सही उत्तर दिए | लेकिन जब गुरूजी ने उस बालक से पूछा तो वो एक भी प्रश्न का सही उत्तर नहीं दे पाया | इस पर गुरूजी बहुत क्रोधित हो गये जब गुरूजी ने उसे मारने के लिए बेंत उठाया तो बालक ने हाथ आगे कर दिया |

गुरूजी ज्योतिष भी जानते थे | उन्होंने देखा कि उस बालक के हाथ में विद्या की रेखा ही नहीं हैं | तब उन्होंने बालक को बताया कि क्यों उसे पाठ याद नहीं हो रहा हैं |

यह बात सुनकर बालक से रहा नहीं गया और उसने कहा -” गुरूजी, विद्या की रेखा रेखा न होने से क्या हुआ , लो में इसे अभी बना देता हूँ|” ये कहकर उस बालक ने पास पड़े हुए नुकीले पत्थर से अपने हाथ में एक रेखा खीच दी |

यहीं बालक आगे चलकर संस्कृत का प्रख्यात विद्वान पाणिनि के नाम से जाना गया |

शिक्षा :- dosto कठिन परिश्रम, लगन और धैर्य से किसी भी मंजिल का पाया जा सकता हैं |

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