महाराजा रणजीत सिंह जीवन के 3 प्रेरक प्रसंग

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महाराजा रणजीत सिंह जीवन के 3 प्रेरक प्रसंग

maharaja ranjeet singh prerak prasang in hindi
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(1) क्या में पेड़ से भी गया गुजरा हूँ।

maharaja ranjeet singh prerak prasang in hindi.एक बार महाराजा रणजीत सिंह शाम के समय अपने सेनापति के साथ टहल रहे थे| अचानक तभी एक पत्थर उनके माथे पर आकर लगा। जिसके कारन उनके माथे से खून बहने लगा।

सेनापति ने अपने सैनिको से पत्थर मारने वाले को पकड़कर लाने की आज्ञा दी|कुछ देर बाद सैनिक एक बूढी महिला को पकड़ लाए|

सैनिक ने कहा महाराज,’ इस बूढी महिला ने पत्थर फैका था’

महाराजा रणजीत सिंह ने कहा,’ माँ आपने ऐसा क्यों किया ‘

तब उस बूढी महिला ने हाथ जोड़कर कहा,’ उसने अपने पोते के लिए फल तोड़ने के लिए पत्थर फेंका था जो गलती से उनके माथे पर लग गया।

यह सुनकर महाराजा रणजीत सिंह ने उस बूढी महिला को कुछ धन दिया और कहा माँ आप जाओ।

यह सुनकर सेनापति से रहा नही गया और वह बोला महाराज आपने उस महिला को धन क्यों दिया जबकि उसने तो आपको पत्थर मारा था|

महाराजा ने कहा कि,’ जब एक पेड़ पत्थर मारने पर फल देता है तो मैं क्या पेड़ से भी ज्यादा गया गुजारा हूँ?

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(2) एकता की ताकत 

maharaja ranjeet singh prerak prasang in hindi.एक बार जब महाराजा रणजीत सिंह अपनी राजधानी लाहौर में अपने दरबार में बैठे थे। तभी उनका एक गुप्तचर आया और उसने बताया की सीमांत नगर पेशावर पर कबीलाई लुटेरों ने हमला कर दिया है। लुटेरों की संख्या लगभग 1500 से 20000 के बीच हैं।

महाराजा रणजीत सिंह ने सेनापति को बुला भेजा और उससे जानकारी ली। सेनापति ने बहुत ही डरते हुए बताया की हमारे पास नगर की रक्षा करने के लिए केवल 150 सैनिक थे। जबकि हमलावरों की संख्या बहुत अधिक हैं। इसलिए वे सैनिक नगर की रक्षा नहीं कर पाए।

इसके बाद महाराजा रणजीत सिंह ने अपने साथ 150 सैनिक लिए और पेशावर नगर पहुचे उन्होंने कबीलाई लुटेरों को मार भगाया।

अब महाराजा रणजीत सिंह ने सेनापति से पूछा अब वे लुटेरो क्यों केवल 150 सैनिकों से हार गए तो सेनापति ने जवाब दिया कि आप की बहादुरी के कारण।

तब महाराजा रणजीत सिंह ने कहा,’ नहीं ऐसा नहीं है पहले जो सैनिक थे। उनमे एकता और जोश नहीं था।अब जो सैनिक लड़े वो पूरे जोश व एकता से लड़े।एकता वो ताकत से बड़े से बड़े दुश्मन को भी आसानी से पराजित कर देती हैं।

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(3) नमक का मूल्य

maharaja ranjeet singh prerak prasang in hindi.महराजा रणजीत सिंह ने अपने जीवन काल में अनगिनत युद्ध लड़े और लगभग सभी युद्धों में विजय प्राप्त की  यह घटना उस समय की हैं,जब एक युद्ध जीतने के बाद महाराजा की सेना वापस लाहौर वापस लौट रही थी, तो रास्ते में रात हो जाने के कारण उनकी सेना एक गाँव के निकट पड़ाव डाला 

रात्रि का भोजन बनने लगालेकिन भोजन बनाने वाले रसोइये ने बताया की नमक नही हैं  तब महाराजा रणजीत सिंह से आज्ञा लेकर एक सैनिक गाँव में नमक लेने चला गया 

जब वह नमक लेकर वापस आया तो महाराजा रणजीत सिंह ने पूछा कि क्या तुमने नमक का मूल्य चुका दिया 

सैनिक ने कहा,’ महाराज नमक का भी क्या मूल्य देना

महाराजा रणजीत सिंह ने कहा की,’जाओ दुकानदार को तुरंत नमक का मूल्य देकर आओ’ 

यदि राजा ही बिना मूल्य चुकाए नमक लेगा तो सेना तो पूरा गाँव ही लूट लेगी|

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