लिंगायत कौन हैं Lingayat kya hai

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Lingayat kya hai
Lingayat kya hai

Lingayat kya hai.दोस्तों आज कल हम लिंगायत बारे में अक्सर समाचार पत्रों व विभिन्न न्यूज चैनलों पर सुनते रहते हैं, तो यह स्वभाविक हैं की हमारे मन में उनके बारे में और अधिक जानने की इच्छा अवश्य उठती होगी तो दोस्तों आज की पोस्ट में हम लिंगायत सम्प्रदाय कौन हैं, इसकी मान्यताएं क्या हैं और ऐसा क्या है जिसके कारण वह लगातार सुर्खियों में बना रहा हैं  

लिंगायत सम्प्रदाय

इस सम्प्रदाय की स्थापना 12 शताब्दी में एक महात्मा वासवन्ना ने की थी जिनका जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था उस समय हिन्दू धर्म में छुआ-छूत और बहुत से आडंबरों व रुढियों का बोल-बाला था जिससे महात्मा वासवन्ना का ह्रदय बहुत ही द्रवित रहता था।उन्होंने ब्राह्मणों की वर्चस्ववादी सामाजिक व्यवस्था का खुलकर विरोध किया।तब उन्होंने एक ऐसे सम्प्रदाय की स्थापना की जो तत्कालीन हिन्दू समाज की विभिन्न कुरीतियों से मुक्त होइस सम्प्रदाय के मानने वाले लिंगायत कहलायेआज के समय में इनकी जनसंख्या कर्नाटक में ही लगभग 18 प्रतिशत( 85 लाख) हैं और कर्नाटक राज्य की राजनीति को प्रभावित करने में इनका विशेष योगदान रहता हैं

मूर्ति पूजा के विरोधी

लिंगायत संप्रदाय के मानने वाले मूर्ति पूजा के घोर विरोधी हैं वे मूर्ति पूजा नहीं करतेइस संप्रदाय के मानने वाले अनुयायी एक अंडे के आकार का इष्टलिंग अपने गले में लटका कर रखते हैं वे इस इष्टलिंग को अपनी आन्तरिक चेतना का प्रतीक मानते हैं जो की उनकी शक्ति का स्रोत हैलिंगायत सम्प्रदाय के अनुयायी पुनर्जन्म में विश्वास नहीं करते हैंइनके अनुसार कर्म ही प्रधान हैं और अपने किये गए कर्मो के आधार पर ही स्वर्ग -नरक की प्राप्ति होती हैं

अंतिम संस्कार

लिंगायत धर्म के अनुयायी हिन्दू धर्म की मान्यता की तरह शव को जलाकर अंतिम संस्कार नही करतेइसमें शव को नहलाकर उसे एक कुर्सी पर बैठाकर कब्रिस्तान ले जाया जाता है। इस अनुष्ठान को विमान बांधना कहते हैंइसके बाद बैठी हुई अवस्था में ही उसकी समाधि दी जाती हैंइस संप्रदाय के लिए अलग से कबिस्तान हैं

लिंगायत और वीरशैव मतों में अंतर

हममें से अधिकतर लोगों का मानना है कि दोनों ही मत एक हैं पर ऐसा नही हैंलिंगायत अनुयायियों के अनुसार वीरशैव सम्प्रदाय उनसे प्राचीन है और वे शिव की पूजा करते हैं जबकि लिंगायत के अनुयायी शिव की उपासना नहीं करते

लिंगायत अलग धर्म का दर्जा क्यों चाहते है

ऐसा लोगों का मानना है कि अलग दर्जा प्राप्त होने से उन्हें एक नई पहिचान मिलेगी और हिन्दू रीति- रिवाजों से अलग हो सकेगेंइसके आलावा एक और सबसे बड़ा कारण है इससे उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त होगा जिससे अल्पसंख्यक वर्ग को मिलने वाली सुविधाएँ का लाभ उन्हें मिल सकेगा

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