टॉल्सटाय के जीवन के प्रेरक प्रसंग| Leo Tolstoy prerak prasang in hindi

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Leo Tolstoy prerak prasang in hindi
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टॉल्सटाय के जीवन के प्रेरक प्रसंग|Leo Tolstoy prerak prasang in hindi

एक दिन टॉल्सटाय अपने शिष्यों के साथ बैठे थे। तब उनके एक शिष्य ने उनसे पूछा, ‘जीवन क्या हैं ‘।

प्रश्न के उत्तर स्वरूप टॉल्सटाय ने उन्हें एक प्रसंग सुनाया, एक बार एक व्यक्ति जंगल से होकर गुजर रहा था। अचानक ही उसके सामने एक हाथी आ जाता है। वह व्यक्ति अपने प्राण बचाने के लिए भागता है। हाथी भी उसका पीछा करता हैं। तभी उस व्यक्ति को जंगल में एक कुआं दिखाई देता हैं ।

वह हाथी से बचनेके लिए कुँए में कूद जाता हैं और कुँए  की दीवारों पर उगे हुए बरगद के पेड़ के शाखा पर अटक जाता हैं। जब उसका ध्यान नीचे जाता हैं तो वह देखता हैं कि एक मगरमच्छ उसकी ओर मुंह बाये उसके गिरने का इंतजार देख रहा हैं । इसके बाद  उसका ध्यान ऊपर की ओर जाता हैं तो वह देखता है कि ऊपर से शहद के छत्ते से शहद टपक रहा हैं तो वह सब कुछ भूलकर मधु पीने में मस्त हो जाता हैं ।

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लेकिन यह क्या वह जिस पेड़ से लटका हुआ था, उसकी जड़ दो चूहे कुतर रहे थे। जिसमें एक का रंग उजला था व् दूसरे का काला था।

टॉल्सटाय ने उस शिष्य से पूछा कि कुछ समझ में आया तो उसने कहा, नहीं गुरु जी

तब टॉल्सटाय ने समझाया कि वह हाथी- काल था ,मगरमच्छ -मृत्यु, मधु – जीवन रस और दो चूहे दिन और रात!।

टॉल्सटाय ने कहा यही जीवन हैं । शिष्य की सभी जिज्ञासा शांत हो चुकी थी ।

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