क्या आप जानते लॉफिंग बुद्धा कौन थे |Laughing Buddha in hindi

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Laughing Buddha in hindi
Laughing Buddha in hindi

Laughing Buddha in hindi.दोस्तों जब भी हम किसी गिफ्ट सेंटर में गिफ्ट खरीदने के लिए जाते हैं, तो हमें वहां रक्खी हुई  Laughing Buddha की विभिन्न साईज की   आकर्षक मूर्तियाँ हमारा ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं। जब भी हम दुकानदार को कहते हैं कि हमें किसी को गिफ्ट देना हैं, तो वह हमें Laughing  Buddha के सलाह देता है। अब हमारे मन में यह कौतुहल जगता हैं की आखिर ये Laughing Buddha हैं कौन। अनजाने में भूलवश हम बौध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध को Laughing Buddha मान लेते हैं । जबकि ऐसा नहीं हैं।

दोस्तों आज की पोस्ट में हम Laughing Buddha के बारे में जानेंगे आखिर Laughing  Buddha कौन थे।

 लॉफिंग बुद्धा कौन थे  – Who is Laughing Budhha

बहुत समय पहले की बात हैं, जब महात्मा बुद्ध के अनुयायी पूरी दुनिया में फैले हुए थे, जापान मैं भी उस समय महात्मा बुद्ध के बहुत अनुयायी थे उनके एक अनुयायी का  जिनका नाम होतेई (Hotei) था। ऐसा विश्वास किया जाता हैं कि जैसे ही  होतेई को आत्मज्ञान का हुआ वह हंसने लगे और आजीवन हंसते ही रहे। इसके बाद उन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य लोगों को हँसाना ही बना लिया।

होतेई एक करिश्माई चरित्र  के व्यक्ति थे,वे  जहाँ – जहाँ वे जाते लोग चुम्बक की तरह उनकी ओर आकर्षित हो जाते और उनके चारों ओर भीड़ लग जाती। वे उनको  हंसाते। उनके उपस्तिथि मात्र से लोग अपने दुखों को भूलकर आनन्द का अहसास करने लगते थे । जब उनका उद्देश्य पूरा हो जाता तो वे थैला उठाकर दूसरे स्थान की ओर चल पड़ते  वहां के लोगों को हंसाकर उनका दुःख दर्द दूर करने के लिए । इसी कारण जापान के लोग उन्हे हंसता हुआ बुद्ध या  लाफिंग बुद्धा(( Laughing Buddha) ) कहने लगे। इन्हीं का नाम  चीन में ‘पु ताई’ | इसके बाद धीरे-धारे इनके मानने वाले ( अनुयायी ) बढ़ने लगे ,पूरी दुनियां में आज करोड़ों लोग उनके अनुयायी है जो उनकेबताये हुए रास्ते पर चल रहे हैं।

  होतेई (Hotei) की पहचान- सफाचट सर , गुब्बारे की तरह फूली हुई  बाहर निकली हुई तोंद, चेहरे पर निश्चल  हँसी एवं गले पर कपड़े का एक थैला जिसमें लोगों और बच्चों को देने के तरह – तरह के उपहारों से भरा हुआ रहता था।वे जिसको दुखी व् परेशान देखते उसे हंसाते और उपहार देते । फिर दूसरे स्थान की ओर खुशियाँ और सम्रद्धि फ़ैलाने के लिए चल पड़ते।

होतेई ये जानते थे कि जब आप हँसते हैं तो शरीर में कुछ परिवर्तन होता हैं और शरीर की ग्रंथियों से अच्छा हार्मोन और एंजाइम पैदा होता है।

जो आपको अच्छा महसूस कराता हैं, तब आप जीवन की समस्याओं को अलग सकारत्मक तरीके से देखते और उन्हें हल करने में आसानी रहती हैं।

होतेई  अपने पूरे जीवन  में लोगों को हंसाते  रहे और उनके जीवन में पॉजिटिव उर्जा भरते रहे और ये कार्य उन्होंने अपने जीवन के अंतिम समय तक किया। जब उन्हें लगा कि उसका अंत निकट आ रहा है,होतेई  ने अपने करीबी साथी से कहा कि उनकी अपनी मृत्यु के बाद उनके शरीर को जला दिया जाये। वे सभी आश्चर्यचकित हुए क्योंकिं ज़ेन बौद्ध धर्म में अंतिम संस्कार का यह तरीका नहीं था। लेकिन उनके शिष्यों उनकी इच्छाएं पूरी की  गईं और जैसे ही उन्होंने उनके  शरीर पर आग लगाई चारों ओर आतिशबाजी उड़ने लगी। निश्चित ही रूप से उन्होंने  अपने कपड़ों में बहुत सारे पटाखें और रॉकेट छिपाए होंगे। ताकि उस गम के माहोल में भी हँसी बनी रहे और उनके अनुयायी दुखी न हो। कालांतर में ये ही बौद्ध भिक्षु Laughing Buddha के नाम से प्रसिद्द हुए।

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