करवा चौथ के व्रत की सही पूजा विधि एवं कथा |Karva chauth puja vidhi vrat katha in hindi

0
153 views

करवा चौथ के व्रत की सही पूजन विधि एवं कथा |Karva chauth pujan vidhi vrat katha in hindi

 

Karva chauth pujan vidhi vrat katha in hindi.

करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि में किया जाता है| इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं |वैसे तो करवा चौथ व्रत चौथ के व्रत  की शुरूआत एक दिन पहले सरगी खाने से शुरु होती है। कुछ लोग व्रत के एक दिन पहले सरगी खाते हैं और कुछ व्रत वाले दिन सुबह सूर्योदय के पहले इसे खाते हैं। सरगी घर के बड़ों द्वारा दी गई भेंट होती है जिसमें श्रंगार के समान के साथ मिठाई फल और मेवे शामिल होते हैं।इस व्रत में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणेश तथा चंद्रमा का पूजन किया जाता है।

करवा चौथ का व्रत कठोर होता है और इसे अन्न और जल ग्रहण किये बिना ही सूर्योदय से रात में चन्द्रमा के दर्शन तक किया जाता है। इसमें विवाहित महिलाएं छलनी से अपनी पति को देखकर पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोलती है|

यह व्रत अलग-अलग क्षेत्रों में वहां की प्रचलित मान्यताओं के अनुरूप रखा जाता है, लेकिन सभी का सार तो एक ही होता है, पति की दीर्घायु; करवा चौथ के व्रत का पूर्ण विवरण  वामन पुराण में भी किया गया है|

अक्‍सर महिलाएं अपनी मां या फिर अपनी सास से करवा चौथ करने की विधि सीखती हैं लेकिन अगर आप अपने घर से दूर रहती हैं और यह व्रत करना चाहती हैं तो इसकी विधि जाननी जरुरी है। तो आइये जानते क्‍या है करवा चौथ के कथा और व्रत की सही विधि

करवा चौथ शुभ मुहूर्त-

चांद दिखने का समय :  8:10 बजे से 8:40 बजे  के बीच

पूजन का समय : 5:54 से 7:09 बजे तक

दिन व् तारीख : रविवार 08.10.2017

करवा चौथ व्रत विधि-

प्रात: काल सूर्योदय से पहले नित्यकर्म से निवृ्त होकर संकल्प लें और व्रत आरंभ करें|प्रातः पूजा के समय इस मन्त्र के जप से व्रत प्रारंभ किया जाता है- ‘मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये|

मां पार्वती, महादेव शिव व गणेश जी का ध्‍यान पूरे दिन अपने मन में करती रहें|’

मंदिर की दीवार पर दीवार पर गेरू और पिसे चावलों के घोल से करवा बनायें | इस चित्र को वर कहते हैं और इस प्रक्रिया को करवा धरना कहा जाता है|

पूजा के लिए मिट्टी का टोंटीदार करवा लें और उसमें जल भरें| करवे पर ढक्‍कन रखें और अपनी परंपरांओं के अनुसार समान उस पर रखें| करवे पर रोली से स्‍वास्‍तिक बनायें| इसके बाद गौरी-गणेश और चित्रित करवा की परम्परा के अनुसार पूजा करते हुए पति की दीर्घायु की कामना करें और कथा सुनें| कथा सुन कर छन्‍नी से चंद्र दर्शन करें और उसे चन्द्रमा कोअर्घ्य प्रदान करें| इसके बाद सभी सम्‍मानित परिवार जनों के पैर दूकर आर्शिवाद लें, इसके बाद भोजन ग्रहण

महाभारत से संबंधित पौराणिक कथा के अनुसार पांडव पुत्र अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी पर्वत पर चले जाते हैं। दूसरी ओर बाकी पांडवों पर कई प्रकार के संकट आन पड़ते हैं। द्रौपदी भगवान श्रीकृष्ण से उपाय पूछती हैं। वह कहते हैं कि यदि वह कार्तिक कृष्ण चतुर्थी के दिन करवाचौथ का व्रत करें तो इन सभी संकटों से मुक्ति मिल सकती है। द्रौपदी विधि विधान सहित करवाचौथ का व्रत रखती है जिससे उनके समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं। इस प्रकार की कथाओं से करवा चौथ का महत्त्व हम सबके सामने आ जाता है।

करवा चौथ की कहानी (Karva Chauth Vrat katha)

बहुत समय पहले की बात है एक ब्राह्मण परिवार में सात भाई और एक बहिन थी|बहन का नाम करवा था |वे सभी एक दूसरे से बहुत प्यार किया करते थे|क्योंकि सात भाइयों में एक अकेली बहन होने के कारण सभी भाई उसे बहुत प्रेम थे |यहाँ तक कि वे सभी भोजन भी एक साथ करते थे |

शादी के बाद एक बार जब उनकी बहन मायके आई हुई थी। तो चतुर्थी के व्रत वाले दिन शाम को जब भाई खाना खाने बैठे तो अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे। बहन ने बताया कि उसका आज उसका व्रत है और वह खाना चंद्रमा को अर्घ्‍य देकर ही खा सकती है।

उसके भाइयो द्वारा बहिन की यह हालत देखी नही गई अतः छोटे भाई को एक तरकीब सूझी उसने घर के पास ही लगे अशोक के वृक्ष में पत्तों पर दीपक को जलाया तथा उनके पास छलनी रख दी| घर लौटकर उन्होंने बहिन् को बताया की चन्द्रमा निकल चुका है| चांद को देखती है, उसे अर्घ्‍य देकर खाना खाने बैठ जाती है।

Related: करवाचौथ की शुभकामनाएँ व् शायरी |Karvachauth wishes and shayari in hindi

जब उन्होंने भोजन का पहला निवाला मुह में रखा तो छीक आ जाती हैं | दूसरा निवाला खाते ही उनके मुह में बाल आया, तीसरा निवाला मुंह में रखा ही था कि उनके पति की मृत्यु की खबर आ गई| वह बेहद दुखी हो जाती है|

तब उसकी भाभी सच्चाई बताती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं|

इस पर करवा निश्चय करती है कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं करेगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवित करुँगी | वह पूरे एक वर्ष  तक अपने पति के शव के पास बैठी रहती है। उसकी देखभाल करती है। उसके ऊपर उगने वाली सूई नुमा घास को वह एकत्रित करती रही |

एक साल बाद फिर चौथ का दिन आता है, तो वह व्रत रखती है और शाम को सुहागिनों से अनुरोध करती है कि ‘यम सुई ले लो, पिय सुई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागिन बना दो’ लेकिन हर कोई मना कर देती है। आखिर में एक सुहागिन उसकी बात मान लेती है। इस तरह से उसका व्रत पूरा होता है और उसके सुहाग को नये जीवन का आर्शिवाद मिलता है। इसी कथा को सभी व्रत करने वाली महिलायें पढ़ती और सुनती हैं।

—————————————————————

दोस्तों यदि आपके पास करवा चौथ के व्रत की सही पूजा विधि एवं कथा |Karva chauth puja vidhi vrat katha in hindi  में ओर जानकारी हैं, या हमारे द्वारा दी गई जानकारी में कुछ त्रुटी लगे या कोई सुझाव हो तो comment करके सुझाव हमें अवश्य दें |हम इस पोस्ट को update करते रहेंगें |

दोस्तों यदि आपको हमारी पोस्ट अच्छी लगी हो तो उसे like और share अवश्य करें |

धन्यवाद 🙂

अवश्य पढ़े

 

 

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here