ईश्वर चंद्र विद्यासागर प्रेरक प्रसंग| Iswar Chandra Viddhyasagar prerak prasang

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ईश्वर चंद्र विद्यासागर प्रेरक प्रसंग| Iswar Chandra Viddhyasagar prerak prasang

ईश्वर चंद्र विद्यासागर एक महान समाजसुधारक, शिक्षाविद् और स्वतंत्रता सेनानी थे उनका जीवन हमारे लिए हमेशा से ही प्रेरणा स्रोत का कार्य करता रहा हैं। ऐसे महान व्यक्ति के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंग आज भी प्रासंगिक है और बेहतर समाज की नींव रखने में सहायक हो सकते हैं। पेश है इस महापुरुष के जीवन से जुड़ी दो सच्ची घटनाएें – Iswar Chandra Viddhyasagar prerak prasang

अपना काम स्वयं करना चाहिए।

एक बार ईश्वर चंद्र विद्यासागर ट्रेन के द्वारा कलकत्ता से वर्द्धमान किसी समारोह में शामिल होने जा रहे थे। उनकी बोगी में एक नौजवान भी था, जिसने बहुत अच्छे कपडे पहन रखे थे। वर्द्धमान पहुंचने पर वह युवक कुली तलाशने लगा ताकि सामान उठाया जा सके। कुली नहीं मिला, तो परेशान होने गया। इस पर विद्यासागर ने कहा, लाओ, मैं तुम्हारा सामान उठा लेता हूं। युवक खुश हो गया। बोला- मैं आपकी पूरी मजदूरी दूंगा। घर पहुंचकर वह नवयुवक विद्यासागर को पैसे देने लगा, लेकिन उन्होंने नहीं लिए।

अगले दिन वर्द्धमान में विद्यासागर के स्वागत के लिए बहुत से लोग जमा हुए। वह नवयुवक भी वहां आया। उसने देखा की यह तो वही व्यक्ति है जो कल मेरा सामान लेकर आया था। उसे आश्चर्य हुआ और शर्म भी आई। सभा समाप्त हुई तब वह विद्यासागर के पास गया और पैरो पर गिरकर माफी मांगी। विद्यासागर ने समझाया कि अपना काम स्वयं करना चाहिए।

भिखारी बना  व्यापारी

यह तब की बात है जब विद्यासागर कोलकाता में पढ़ाते थे। उनका वेतन इतना ही था कि गुजारा हो सके। ऐसे में भी वे जरुरतमंदों की मदद में पीछे नहीं रहते थे।

एक दिन की बात है। विद्यासागर बाजार से गुजर रहे थे, तभी एक युवक आगे आया और भीख में एक आना मांगने लगा। विद्यासागर ने देखा, युुवक हट्टा-कट्टा है, फिर भी भीख मांग रहा है। उन्होंने युवक से बात की और उसकी परेशानी समझी।

सारी बात सुनने के बाद विद्यासागर ने कहा, यदि मैं तुम्हें एक रुपया दूं तो तुम उसका क्या करोगे? युवक बोला- मैं कुछ सामान खरीदूंगा और गली में घूम-घूमकर उसे बेचूंगा। इस तरह मुनाफा कमाने की कोशिश करूंगा। विद्यासागर प्रभावित हुए। उन्होंने उसे एक आने के बजाए एक रुपया दिया और अपने रास्ते चल दिए।

युवक ने एक रुपए से छोटा-मोटा धंधा शुरू किया। खूब मेहनत की। धीरे-धीरे व्यापार बढ़ने लगा और वह देखते ही देखते बड़ा आदमी बन गया। कुछ माह बाद विद्यासागर का उसी रास्ते से गुजरना हुआ। वे अपनी धून में जा रहे थे, तभी अच्छे पकड़े पहने एक नौजवान आया और पैर छूने लगा। विद्यासागर कुछ समझ नहीं पाए। पूछने पर युवक ने बताया कि वह वही शख्स है, जिसे विद्यासागर ने एक रुपया दिया था और अब वह बड़ा व्यापारी बन गया है।

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