इन 8 दिनों में न करें कोई शुभ कार्य Holashtak in hindi

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इन 8 दिनों में न करें कोई शुभ कार्य

Holashtak in hindi
Holashtak in hindi

Holashtak in hindi

  Holashtak in hindi .होलाष्टक (Holashtak) शब्द, होली + अष्टक, शब्दों से मिलकर बना हैंजिसका शाब्दिक अर्थ होता है होली के आठ दिनइसे इस प्रकार भी समझा जा सकता हैं होलिका दहन से पूर्व के आठ दिन,या ये कहा जा सकता हैं होली के त्यौहार की पूर्व सूचना हमें होलाष्टक के शुरू होने से ही मिलती हैं

होलाष्टक फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी से शुरू होकर फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तक रहता हैंशुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को ही होलिका का पर्व मनाया जाता हैं

भारतीय ज्योतिष के अनुसार हम मानते हैं की ग्रहों का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता हैंजो हमारे कर्मो को प्रभावित करता हैं

अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहू उग्र स्वभाव में रहते हैं होलाष्टक के दौरान इन ग्रहों का स्वभाव उग्र रहता हैंजिसके कारण हमारी निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती हैं जीवन में गलत लिए गए निर्णय हमें कभी -कभी बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा जाते हैं

क्या न करें

होलाष्टक के शुरू होने पर कोई भी मंगलकारी व शुभ कार्य न करें जैसे-विवाह, गर्भधान,पुंसवन, नामकरण,गृह प्रवेश, गृह निर्माण का शुभारम्भ,नया व्यवसाय शुरू करना,नया वाहन खरीदना, आदि कोई भी शुभ कार्य  इन दिनों में पूर्णत: निषिद्ध माना गया हैं

क्या करें

हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार यदि इन दिनों में जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र या कोई वस्तु दान की जाये, जिससे उनके कष्टों का निवारण हो सके तो होलाष्टक का प्रभाव कम होता हैं

होलाष्टक से जुडी दो मान्यताएं

प्रथम मान्यता के अनुसार-

एक बार भगवान् शिव बहुत दिनों तक ध्यान में लीन रहे तब देवताओं के अनुरोध पर कामदेव ने अपने प्रेम बाण चलाकर उनका ध्यान भंग किया इस पर भगवान् शिव बहुत क्रोधित हुए उन्होंने उन्हें अपने तीसरे नेत्र से भस्म कर दिया तब कामदेव के पत्नी रति और सभी देवी-देवताओं ने भगवान् शिव से पुन: जीवित करने की प्रार्थना कीभगवान् शिव ने कामदेव के अपराध को क्षमा कर उन्हें पुनर्जीवित कर दिया। फाल्गुन शुक्ल अष्टमी को कामदेव भस्म हुए थे तथा 8 दिन बाद वे पुनर्जीवित हुए थे

दूसरी मान्यता के अनुसार-

दैत्यराज  हिरण्यकश्यप ने भगवान से वरदान मिलने के बाद भक्त प्रह्लाद पर अत्याचार करना शुरू कर दिया था। फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी को हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रह्लाद को बंदी बनाकर यातनाएं दी। साथ ही होलिका ने भी प्रह्लाद को जलाने का प्रयास किया, लेकिन वह स्वयं ही जल गई और प्रह्लाद बच गए। इन आठ दिनों में प्रह्लाद को यातनाएं देने के कारण ही यह समय होलाष्टक कहा जाता है।

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