गुरु गोविन्द सिंह के जीवन के प्रेरक प्रसंग| Guru Govind singh prerak prasang in hindi

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गुरु गोविन्द सिंह के जीवन के प्रेरक प्रसंग| Guru Govind singh prerak prasang in hindi

 Guru Govind singh prerak prasang in hindi
Guru Govind singh prerak prasang in hindi

एक बार गुरु गोविंद साहब के अपने कुछ शिष्यों के साथ बैठे हुए थे । तभी एक शिष्य ने कहा , ‘गुरू जी! आपके कहे अनुसार  हम हर रोज जप करते हैं, लेकिन इससे हमें कोई लाभ नहीं होता है। इसका क्या कारण है?’

गुरु जी ने अपने युवा शिष्य की बात सुनी और  कुछ कहा नहीं, ‘सिर्फ मुस्कुराए।’

कुछ देर बाद उन्होंने मदिरा से भरा एक घड़ा मंगाया और उन शिष्यों को बुला कर कहा, ‘इससे कुल्ला करके घड़ो को खाली कर दो।‘ शिष्यों ने वैसा ही किया।

तब गोविंद सिहं जी ने पूछा, ‘क्या घड़े की सारी मदिरा समाप्त हो गई है। और क्या तुम लोगों पर  नशा चढ़ा।’

सभी शिष्य बोले, ‘जब मदिरा पेट में गई ही नहीं तो नशा कैसे चढ़ेगा।’

गुरू जी मुस्कुराए, और बोले, ‘जिस तरह गले के नीचे न उतरने से मदिरा का असर नहीं पड़ा। ठीक उसी तरह जब तक जप ह्दय से नहीं करोगे, उसमें डूब नहीं जाओगे। उसका कोई लाभ नहीं मिलेगा।’

शिक्षा

किसी भी कार्य में सफलता उस कार्य को पूरी मेहनत व् दिल से समर्पित होकर करने से मिलती हैं।

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