घनश्यामदास बिड़ला प्रेरक प्रसंग| Ghanshyamdas Bidala prerak prasang

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Ghanshyamdas Bidala prerak prasang
Ghanshyamdas Bidala prerak prasang

Ghanshyamdas Bidala prerak prasang.आज का प्रेरक प्रसंग देश के प्रमुख बिजनेस मैंन घनश्यामदास बिड़ला के जीवन से लिया गया है। एक दिन घनश्यामदास बिड़ला अपने घर से अपने कार्यालय जा रहे थे। जहाँ उन्हें एक महत्वपूर्ण व्यक्ति से मिलना था उन्हें देर हो चुकी थी। इसलिए उनका ड्राईवर गाड़ी तेज चला रहा था।

गाड़ी जब एक तालाब के पास से गुजर रही थी, तो वहां बहुत भीड़ इकट्ठी थी।  उन्होंने अपनी गाड़ी रुकवाकर वहां खड़े एक आदमी से पूछा क्यों भाई क्या बात हैं इतने लोग क्यों इकट्ठा हैं। उस आदमी ने बताया कि तालाब में एक बच्चा डूब गया है।

घनश्यामदास बिड़ला गाड़ी से नीचे उतरे तो देखा कि सब बाहर खड़े होकर बचाव-बचाव तो चिल्ला रहें हैं। पर कोई भी उस बच्चे को बचाने के लिए तालाब मैं नही कूद रहा है।  ये देखकर घनश्यामदास बिड़ला जूते पहने-पहने ही तालाब में कूद गये और तैरकर बालक को पकड़ा और खींच कर उसे बाहर निकाल कर लाये।  तुरंत ही उसे अस्पताल ले कर गये जब डॉक्टर ने बच्चे की जाँच कर बताया की अब बच्चे की जान को कोई खतरा नही हैं, तब वे अपने कार्यालय गये।

उनके भीगे कपडे देखकर जब उनके कर्मचारियों ने पूछा तो घनश्यामदास बिड़ला ने तो कुछ नहीं बताया पर उनके ड्राईवर ने सब कुछ बता दिया। ये सुनकर कर्मचारियों ने उस लड़के की जान बचाने के लिए धन्यवाद दिया तो घनश्यामदास बिड़ला ने जवाब दिया इसमें धन्यवाद देने की जरूरत नहीं हैं ये तो हमारा कर्तव्य हैं |

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