मुर्ख साधू और ठग| foolish saga and swindler panchtantra tale in hindi

0
328

बहुत समय पहले की बात हैं | एक साधू नगर से बाहर एक मंदिर में रहता था , जिसकी ख्याति पूरे नगर मे फैली हुई थी | सभी नगर वासी साधू का बहुत सम्मान करते थे | नगरवासी साधू से आशीर्वाद  लेने आते तो साधू के लिए भेंट स्वरूप धन , वस्त्र और महंगे उपहार लाते |

साधू अपनी  जरूरत का समान रख कर और सभी उपहारों  को बेच कर धन ले लेता, इस प्रकार साधू के पास बहुत सारा धन एकत्र हो गया | साधू किसी पर विश्वास नही करता न था | उसने सारा धन एक थेले में रक्खा और उसे वह हर समय अपने पास रखता | उस थेले को वह कभी भी अकेला नहीं छोड़ता था |

एक दिन एक ठग साधू कि पास आया उसने पहिचान लिया की साधू के पास थेले मैं बहुत सारा धन हैं | उसने साधू से थेले को चुराने कि योजना बनाई , पर वह सफल न हो सका | तब ठग ने साधू का विश्वास जीतकर धन चुराने कि योजना बनाई |

ठग साधू के पैरो में गिर गया और बोला , ‘ बाबा मुझे अपना शिष्य बना कर मेरा जीवन सफल बना दो , में अपने वर्तमान जीवन से तंग आ गया हूं , में शान्ति कि तलाश करना चाहता हूं |’

साधू ने कहा ,’ पुत्र उठो में तुम्हारा मार्गदर्शन करूंगा , तुम निश्चित ही धन्य हो कि इस युवा अवस्था में शान्ति पाने मेरे पास चले आये |

साधू ने उस ठग को शिष्य के रूप में स्वीकार कर लिया, लेकिन साधू ने एक शर्त रक्खी कि रात्रि में , मैं ध्यान लगाता हूं , इसलिए तुम्हें रात्रि में  मंदिर में आने कि इजाजत नहीं होगी |

उस ठग ने कहा बाबा मुझे आपकी हर शर्त मंजूर हैं | मैं वही करूंगा जो आप कहोगे, मैं  आपकी खूब सेवा करूंगा |

इस प्रकार ठग साधू की सेवा करने लगा वह मंदिर कि सफाई करता , पूजा- पाठ में साधू का साथ देता और खाली समय में साधू के पैर दबाता | इस प्रकार वह साधू का विश्वास जीतने का प्रयास करने लगा |

धीरे – धीरे समय गुजरता गया ,पर ठग साधू का पूर्ण विश्वास नहीं जीत पाया | इससे वह हताश होने लगा और वह सोचने लगा कि अब तो शायद साधू को मारकर ही धन प्राप्त हो पायेगा |

वह यह सोच ही रहा था कि उसी समय साधू के अनुयायी का एक युवा पुत्र , साधू को अपने यहाँ होने वाली एक पूजा में आमंत्रित करने आया | साधू ने उसका आमन्त्रण स्वीकार कर लिया |

पूजा वाले दिन साधू ठग के साथ शहर की ओर चलने लगा | चलते – चलते साधू थक गया क्योकि साधू के पास वह धन वाला थैला भी था | उसने वह थैला ठग को दे दिया | ठग तो इसी दिन का बहुत दिन से इंतजार कर रहा था | शहर व मंदिर के बीच एक नदी भी पड़ती थी , जैसे ही साधू नदी पार करने के लिए नदी में उतरा , ठग थैला लेकर भाग गया |

साधू ने उसका पीछा करने का प्रयास किया | पर ठग युवा था , वह उसका पीछा नही कर पाया | साधू ने ठग को बहुत ढूढने का बहुत प्रयास किया पर ठग नहीं मिला , तब साधू निराश होकर दुखी मन से मंदिर वापस लौट आया |

Moral of the story :- चापलूस व बहुत अधिक मीठा बोलने वाले व्यक्ति पर एकदम विश्वास नही करना चाहिये | ऐसे व्यक्ति से हमेशा सावधान रहना चाहिये |

——————————————————————————

मुर्ख साधू और ठग| foolish saga and swindler panchtantra tale in hindi |ये प्रेरक कहानियां कैसी लगी, कमेंट द्वारा अवश्य बताये | यदि आपके पास भी कोई motivational article/ motivational story हैं और आप उसे हमारे साथ शेयर करना चाहते हैं तो onlinedost4u@gmail.com par भेजें |जिसे आपके नाम व फोटो सहित प्रकाशित किया जायेगा |

अन्य हिंदी प्रेरक कहानियां यहाँ पढ़े

  1. लड़ती बकरियां और सियार /Fighting goats and The jackal
  2. दुष्ट कोबरा और  कौए / The Cobra and The crow
  3. बगुला और केकड़ा / The Crane & The crab , A panchtantra tale
  4. वीर बालक बादल: जिसका राजपुताना सदैव ऋणी रहेगा |
  5. वीर बालक रामसिंह राठौर : जिसने शाहजहाँ की सत्ता को चुनौती

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here