डॉ० जाकिर हुसैन के जीवन का प्रेरक प्रसंग| Dr. Zakir Hussain in hindi

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डॉ० जाकिर हुसैन के जीवन का प्रेरक प्रसंग| Dr. Zakir Hussain motivational story in hindi

 

Dr. Zakir Hussain in hindi

जाकिर हुसैन भारत के तीसरे राष्ट्रपति थे, देश के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति थे। ये प्रसंग उस समय का है जब डॉ. जाकिर हुसैन अध्ययन के लिए जर्मनी गए हुए थे। जर्मनी मैं उस समय एक रिवाज प्रचलित था जब भी कोई दो अनजान व्यक्ति आपस मैं मिलते थे, तो वे अपना नाम बता कर दुसरे की और हाथ मिलाने के लिए बढा देते थे | इस प्रकार दोनों का परिचय भी हो जाता था और वे आपस मैं मित्र भी बन जाते थे । कमोबेश ये रिवाज आज भी भारत सहित सभी देशों मैं आज भी मनाया जाता है ।

एक दिन जाकिर हुसैन के कॉलेज में वार्षिकोत्सव मनाया जा रहा था। कार्यक्रम का समय हो चुका था और जाकिर हुसैन को वहां  पहुँचने मैं देरी हो गई थी ।  इसलिए जाकिर हुसैन भी जल्दी-जल्दी वहां जाने के लिए अपने कदम बढ़ा रहे थे। जैसे ही उन्होंने कॉलेज में प्रवेश किया, एक शिक्षक महोदय भी वहां पहुंचे। दोनों ही जल्दबाजी थे इसलिए वे अनजाने में एक-दूसरे से टकरा गए।

शिक्षक महोदय जाकिर साहब से टकराने के बाद गुस्से से उन्हें देखते हुए बोले, ‘ईडियट।’

यह सुनकर जाकिर हुसैन  ने फौरन अपना हाथ आगे की ओर बढ़ाया और बोले, ‘जाकिर हुसैन। भारत से यहां पढ़ने के लिए आया हुआ हूं।’

जाकिर साहब की हाजिरजवाबी देखकर शिक्षक महोदय का गुस्सा एक दम काफूर हो गया और वे हल्की सी मुस्कराहट के साथ बोले, ‘बहुत खूब। आपकी इस हाजिरजवाबी ने मुझे प्रभावित कर दिया।

इस तरह परिचय देकर आपने हमारे देश के रिवाज को भी मान दिया है और साथ ही मुझे मेरी गलती का अहसास भी करा दिया है।

वाकई हम अनजाने में एक-दूसरे से टकराए थे। ऐसे में मुझे क्षमा मांगनी चाहिए थी। अपशब्द नहीं बोलने चाहिए थे।’

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