डॉ भीमराम आम्बेडकर का जीवन परिचय Dr B.R.Ambedkar Biography in hindi

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Dr B.R.Ambedkar Biography in hindi
Dr B.R.Ambedkar Biography in hindi

Dr B.R.Ambedkar Biography in hindi .डॉ भीमराम अम्बेडकर बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे वे प्रसिद्द राजनीतिज्ञ ,समाज सेवक, विधिवेत्ता थे उन्होंने जीवन भर समाज के दबे-कुचले वर्ग के लोगों के उत्थान के लिए संघर्ष किया वे कहा करते थे कि,” मैं रात-रात भर जागता हूँ क्योकिं में जिस समाज के लिए कार्य कर रहा हूँ वह सो रहा हैं “आपने लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि ग्रहण की कुछ समय तक अर्थशास्त्र के शिक्षक के रूप में भी काम किया और बाद में वे समाजसेवा व राजनीति में उतर आये आपको 1990 में मरणोपरांत भारतरत्न से भी सम्मानित किया गया 

डॉ भीमराम अम्बेडकर का जीवन परिचय Dr B.R.Ambedkar Biography in hindi

  • पूरा नाम  – भीमराव रामजी अम्बेडकर
  • जन्म       – 14 अप्रेल 1891
  • जन्मस्थान – महू. (जि0-इंदौर मध्यप्रदेश)
  • पिता       – रामजी मालोजी सकपाल
  • माता       – भीमाबाई
  • शिक्षा      – 1915  में एम. ए. (अर्थशास्त्र)। 1916 में कोलंबिया विश्वविद्यालय में से PHD। 1921 में मास्टर ऑफ साइंस। 1923  में डॉक्टर ऑफ साइंस।
  • विवाह     – दो बार, पहला रमाबाई के साथ (1908 में) दूसरा डॉ. सविता कबीर के साथ (1948 में)
  • मृत्यु  –6 दिसंबर 1956 दिल्ली (भारत
  • अन्य नाम  – बाबा साहेब
  • राजनीतिक पार्टी  – भारतीय रिपब्लिकन पार्टी
  • पुरुस्कार    – भारत रत्न (1990)

प्रारंभिक जीवन 

भीमजी रामजी का जन्म ब्रिटिश शासित मध्य भारत की महू नगर में हुआ था, जो वर्तमान में मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में स्थित हैं इनका जन्म उस समय अछूत समझी जाने वाली महार जाति में हुआ था उस समय भारतीय समाज में जाति व आर्थिक आधार पर बहुत अधिक भेद भाव किया जाता था इसीलिए भीमराम जी को भी बचपन से ही इस प्रकार के भेद भाव का सामना करना पड़ा इनके पिता ने इनका प्रवेश स्कूल में भीमराम जी अंबावडेकर के नाम से करा दिया उस समय अपने नाम के आगे गाँव के नाम को रखने का प्रचलन था क्योकिं इनके मूल गाँव का नाम अंबावडे था उसी पर उनका नाम रक्खा गया बाद में उनके गुरु जो कृष्णा महादेव आंबेडकर  ने उनका नाम भीमराम जी आंबेडकर रख दिया 

शिक्षा 

 अम्बेडकर एल्फिंस्टोन रोड पर स्थित गवर्न्मेंट हाई स्कूल के पहले अछूत छात्र बने।बाद में गायकवाड़ शासक द्वारा दी गई छात्रवृति पर वे न्यूयार्क गए और वहां उन्होंने राजनीति विज्ञान विभाग के स्नातक अध्ययन कार्यक्रम में प्रवेश ले लिया 1916 में उन्हें  एक शोध के लिए पीएच.डी. से  सम्मानित किया गया यहाँ से डाक्टरेट के उपाधि लेकर वे लन्दन चले गए और वहां  पर उन्होंने लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में कानून व अर्थशास्त्र में डाक्टरेट करने  के लिए प्रवेश ले लिया पर उन्हें बीच में ही अपनी पढाई छोडनी पड़ी क्योकिं भारत में हालात कुछ बिगड़ गए थे जिसके कारण उनकी छात्रवृति बंद हो गई थी और वे भारत वापस लौट आये 

वापस आकर कुछ दिन उन्होंने बडौदा राज्य के सेना के सचिव के रूप में कार्य किया लेकिन नौकरी में होने वाले भेद भाव के कारण उन्होंने वो नौकरी छोड़ दी और मुंबई के सिडनेम कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनोमिक्स मे राजनीतिक अर्थव्यवस्था के प्रोफेसर के रूप में नौकरी करने लगे 

1920 में कोल्हापुर के महाराज के सहयोग से भीमराम जी पुनः अध्धयन के लिए लन्दन गए 1923 में उन्होंने अपना शोध प्रोब्लम्स ऑफ द रुपी (रुपये की समस्यायें) पूरा कर लिया। उन्हें लंदन विश्वविद्यालय द्वारा “डॉक्टर ऑफ साईंस” की उपाधि प्रदान की गयी। कानून का अध्ययन पूरा होने पर उन्हें ब्रिटिश बार मे बैरिस्टर के रूप में प्रवेश मिल गया|1927 में कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा पीएच.डी. प्रदान की गई 

राजनीतिक व दलित वर्गों के उत्थान की गतिविधियाँ

भारत में आने के बाद भीमराम जी आम्बेडकर ने समाज में फैली हुई अस्पृश्यता के खिलाफ सक्रिय आंदोलन शुरू कर दिया  भीमराम जी से प्रभावित होकर कोल्हापुर के स्थानीय शासक शाहू महाराज ने आम्बेडकर के साथ भोजन कर रुढ़िवादी भारतीय समाज में हलचल पैदा कर दी इसके बाद तो भीमराम आम्बेडकर ने अस्पर्श्यता के खिलाफ जैसे युद्ध ही छेड़ दिया उन्होनें अछूतों को भी हिंदू मंदिरों में प्रवेश करने का अधिकार दिलाने के लिये भी संघर्ष किया उन्होंने महड में अस्पृश्य समुदाय को भी शहर की पानी की मुख्य टंकी से पानी लेने का अधिकार दिलाने कि लिये सत्याग्रह चलाया।

भीमराम आम्बेडकर जी ने गाँधी जी के द्वारा अस्पृश्य समुदाय को दिए गए नाम हरिजन से भी घोर आपत्ति थी वे चाहते थे की अस्पृश्य समुदाय को बराबर का सामाजिक दर्जा मिले न कि यह नाम देकर उन्हें मुख्य समाज से अलग देखा जाये।1936 में आम्बेडकर ने स्वतंत्र लेबर पार्टी की स्थापना की, जिसने 1937 के चुनाव में 15 सीटें जीतीजिसके फलस्वरूप वे वाइसराय की कार्यकारी परिषद के लिए श्रम मंत्री के रूप में सेवारत रहे आम्बेडकर देश आजाद होने तक निरंतर अस्पृश्य समुदाय के हितों की रक्षा के लिए अंग्रेजों व महात्मा गाँधी की कांग्रेस से लड़ते रहे 

भारतीय संविधान के निर्माण में योगदान

15 अगस्त १९४७ के देश आजाद होने के बाद जब कांग्रेस सरकार अस्तित्व में आई तो वे पहले कानून मंत्री बने और जब देश को नये संविधान की आवश्यकता पड़ी तो उनकी विधि विशेषज्ञता के कारण उन्हें संविधान सभा की प्रारूप समिति का अध्ध्यक्ष चुना गय डॉ भीमराम आम्बेडकर ने इस जिम्मेदारी को बखूभी निभाया भारत को विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान दिया जिसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया 

बौध धर्म की ओर झुकाव 

ऐसा नहीं की डॉ भीमराम आम्बेडकर का झुकाव अचानक ही बौध धरम की ओर हो गया था उन्होंने सभी प्रचलित धर्मो के बारे में अध्धयन किया वो ऐसा धर्म चाहते थे जिसमें सदियों से दबे-कुचले शोषित अछूत वर्गों को समाज में बराबर का दर्जा दिला सके उन्हें वे सब खूबियाँ बौध धर्म में मिली और उन्होंने 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में  खुद और अपने समर्थकों के साथ  श्रीलंका के एक महान बौद्ध भिक्षु महत्थवीर चंद्रमणी से पारंपरिक तरीके से त्रिरत्न ग्रहण कर और पंचशील को अपनाते हुये बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया 

डॉ भीमराम आम्बेडकर लम्बे समय से मधुमेय से ग्रसित थे इसलिए  6 दिसम्बर 1956 को अम्बेडकर का महापरिनिर्वाण नींद में दिल्ली में उनके घर मे हो गया 

डॉ भीमराम आम्बेडकर के कुछ सिद्धांत थे- यथा-सत्य, अहिंसा ,स्वतंत्र्यता, समानता, भाईचारा,विज्ञानवाद, मानवतावाद,बौद्ध धर्म आदि जिन्हें आम्बेडकरवाद से जाना गया|

डॉ भीमराम आम्बेडकर के कुछ प्रसिद्द अनमोल विचार 

  • जीवन  लम्बा  होने  की  बजाये  महान  होना  चाहिए 

  • ज्ञान व्‍‍यक्ति के जीवन का आधार हैं 

  • मैं  ऐसे  धर्म  को  मानता  हूँ  जो  स्वतंत्रता , समानता , और  भाई -चारा  सिखाये 

  • जब  तक  आप  सामाजिक  स्वतंत्रता  नहीं  हांसिल  कर  लेते  , क़ानून  आपको  जो भी  स्वतंत्रता  देता  है  वो  आपके  किसी  काम  की  नहीं 

  • अपने भाग्य के बजाय अपनी मजबूती पर विश्वास करो 

  • रात रातभर मैं इसलिये जागता हूँ क्‍योंकि मेरा समाज सो रहा है 

  • अच्छा दिखने के लिए मत जिओ बल्कि अच्छा बनने के लिए जिओ 

  • जो झुक सकता है, वह सारी दुनिया को झुका भी सकता है 

अवश्य पढ़े  इन महापुरुषों का जीवन परिचय 


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