2017 धनतेरस पूजा विधि और  व्रत कथा| Dhanteras puja vidhi or vrat katha

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 Dhanteras puja vidhi or vrat katha in hindi

2017 धनतेरस पूजा विधि और कथा | Dhanteras puja vidhi or vrat katha in hindi

धनतेरस हिन्दु धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है।धनतेरस का पर्व कार्तिक मास त्रयोदशी को  हर साल दिवाली से ठीक दो दिन पहले मनाया जाता है। हिन्दू धर्म में धनतेरस को एक सुख-समृद्धि, यश और वैभव के त्योहार के रूप में मानते है। इस दिन हम लोग धन के देवता कहे जाने वाले भगवान् कुबेर और माँ लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व है। धनतेरस से ही दिवाली की शुरुआत हो जाती है।

हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को मनाए जाने वाले इस महापर्व के बारे में स्कन्द पुराण में लिखा है कि इसी दिन देवताओं के वैद्य धन्वंतरि अमृत कलश सहित सागर मंथन से प्रकट हुए थे, जिस कारण इस दिन धनतेरस (Dhanteras) के साथ-साथ धन्वंतरि जयंती भी मनाई जाती।

धनतेरस पर भगवान यमराज के निमित्त दीपदान किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो धनतेरस के दिन दीपदान करता है उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता।

धनतेरस का अर्थ

धन का मतलब पैसा और दौलत होता है और तेरस का मतलब कार्तिक के कृष्ण पक्ष का तेरहवां दिन होता है इसलिए इसको धन तेरस कहा जाता हैं।

धनतेरस का महत्व | Importance of Dhanters in Hindi

धनतेरस पर बर्तन खरीदने का महत्व है। ऐसा माना जाता है कि समुद्र मंथन के समय धनवंतरि हाथ में अमृत का कलश लेकर निकले थे। इस कलश के लिए देवताओं और दानवों में भारी युद्ध भी हुआ था। इस कलश में अमृत था और इसी से देवताओं को अमरत्व प्राप्त हुआ। तभी से धनतेरस पर प्रतीक स्वरूप बर्तन खरीदने की परंपरा है। इस बर्तन की भी पूजा की जाती है और खुद व परिवार की बेहतर सेहत के लिए प्रार्थना की जाती है।

धनतेरस 2017 शुभ मुहूर्त

धन तेरस तिथि – 17 अक्तूबर 2017, मंगलवार

धनतेरस पूजन मुर्हुत – सायं 07:19 बजे से 08:17 बजे तक

प्रदोष काल – सायं 05:45 से रात्रि 08:17 बजे तक

वृषभ काल – सायं 07:19 बजे से रात्रि 09:14 बजे तक

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ – मध्यरात्रि 00:26 से, 17 अक्तूबर 2017

त्रयोदशी तिथि समाप्त – सायं 00:08 बजे, 18 अक्तूबर 2017

धन तेरस मनाये जाने के पीछे कई पौराणिक व्रत कथाएं प्रचलित हैं जो निम्न प्रकार हैं।

1.धनतेरस व्रत कथा | Dhanteras Vrat Katha in Hindi – 

एक समय यमराज ने अपने दूतों से पूछा कि क्या कभी तुम्हें प्राणियों के प्राण का हरण करते समय किसी पर दयाभाव भी आया है, तो वे संकोच में पड़कर बोले- नहीं महाराज! यमराज ने उनसे दोबारा पूछा तो उन्होंने संकोच छोड़कर बताया कि एक बार एक ऐसी घटना घटी थी, जिससे हमारा हृदय कांप उठा था। हेम नामक राजा की पत्नी ने जब एक पुत्र को जन्म दिया तो ज्योतिषियों ने नक्षत्र गणना करके बताया कि यह बालक जब भी विवाह करेगा, उसके चार दिन बाद ही मर जाएगा। यह जानकर उस राजा ने बालक को यमुना तट की एक गुफा में ब्रह्मचारी के रूप में रखकर बड़ा किया।

एक दिन जब महाराजा हंस की युवा बेटी यमुना तट पर घूम रही थी तो उस ब्रह्मचारी युवक ने मोहित होकर उससे गंधर्व विवाह कर लिया। चौथा दिन पूरा होते ही वह राजकुमार मर गया। अपने पति की मृत्यु देखकर उसकी पत्नी बिलख-बिलखकर रोने लगी। उस नवविवाहिता का करुण विलाप सुनकर हमारा हृदय भी कांप उठा। उस राजकुमार के प्राण हरण करते समय हमारे आंसू नहीं रुक रहे थे। तभी एक यमदूत ने पूछा -क्या अकाल मृत्यु से बचने का कोई उपाय नहीं है?

यमराज बोले- हां उपाय तो है। अकाल मृत्यु से छुटकारा पाने के लिए व्यक्ति को धनतेरस के दिन पूजन और दीपदान विधिपूर्वक करना चाहिए। जहां यह पूजन होता है, वहां अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता। कहते हैं कि तभी से धनतेरस के दिन यमराज के पूजन के पश्चात दीपदान करने की परंपरा प्रचलित हुई।

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2.धनतेरस व्रत कथा | Dhanteras Vrat Katha in Hindi – 

यह तिथि विशेष रूप से व्यापारियों के लिए अति शुभ माना जाता है। महर्षि धन्वंतरि को स्वास्थ्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार सागर मंथन के समय महर्षि धन्वंतरि अमृत कलश लेकर अवतरित हुए थे। इसीलिए इस दिन बर्तन खरीदने की प्रथा प्रचलित हुई। यह भी माना जाता है कि धनतेरस के शुभावसर पर चल या अचल संपत्ति खरीदने से धन में तेरह गुणा वृद्धि होती है।

3.धनतेरस व्रत कथा | Dhanteras Vrat Katha in Hindi – 

एक और कथा के अनुसार एक समय भगवान विष्णु द्वारा श्राप दिए जाने के कारण देवी लक्ष्मी को तेरह वर्षों तक एक किसान के घर पर रहना था। माँ लक्ष्मी के उस किसान के रहने से उसका घर धन-समाप्ति से भरपूर हो गया। तेरह वर्षों उपरान्त जब भगवान विष्णु माँ लक्ष्मी को लेने आए तो किसान ने माँ लक्ष्मी से वहीं रुक जाने का आग्रह किया। इस पर देवी लक्ष्मी ने कहा किसान से कहा कि कल त्रयोदशी है और अगर वह साफ़-सफाई कर, दीप प्रज्वलित करके उनका आह्वान करेगा तो किसान को धन-वैभव की प्राप्ति होगी। जैसा माँ लक्ष्मी ने कहा, वैसा किसान ने किया और उसे धन-वैभव की प्राप्ति हुई। तब से ही धनतेरस के दिन लक्ष्मी पूजन की प्रथा प्रचलित हुई।

धनतेरस पूजन विधि (Dhanteras Pujan Vidhi in Hindi)-

धनतेरस पूजा में सबसे पहले संध्या को यम दीप की पूजा की जाती है उसके बाद भगवान धन्वन्तरि की पूजा होती है और फिर गणेश लक्ष्मी की पूजा की जाती है

यम दीप दान विधि:-

चौकी को धो कर सुखा लें। उस चौकी के बीचोंबीच रोली घोल कर 卐(स्वास्तिक या सतिया) बनायें ।अब इस 卐(स्वास्तिक या सतिया) पर सरसों तेल का दीपक (गेहूँ के आटे से बना हुआ )जलायें । उस दीपक में छेद वाली कौड़ी को डाल दें। अब दीपक के चारों ओर गंगा जल से तीन बार छींटा दें।अब हाथ में रोली लें और रोली से दीपक पर तिलक लगायें । अब रोली पर चावल लगायें। अब दीपक के अंदर थोड़ी चीनी/शक्कर दाल दें।अब एक रुपए का सिक्का दीपक के अंदर डाल दें।दीपक पर फूल समर्पित करें । अब परिवार जन दीपक को हाथ जोड़कर प्रणाम करें। फिर सभी सदस्यों को तिलक लगाए ।अब दीपक को उठा कर घर के मुख्य दरवाजे के बाहर दाहिनी ओर यम दिशा में रख दे (दीपक का लौ दक्षिण दिशा की ओर होनी चाहिए)।

धन्वन्तरि पूजन विधि:-

यम दीप की पूजा के बाद धन्वन्तरि पूजा की जाती है ।पूजा घर मे बैठ कर भगवान धन्वन्तरि के मंत्र का 108 बार जाप किया जाता है।
“ॐ धं धन्वन्तरये नमः”
जाप के पूर्ण करने के बाद दोनों हाथों को जोड़कर कहे कि “ हे भगवान धन्वन्तरि ये जाप मैं आपके चरणों में समर्पित करता हूँ। कृपा हमें उत्तम स्वास्थ प्रदान करे ।“
धन्वन्तरि का पूजा हो जाने पर अंत में गणेश लक्ष्मी की पूजा करे

गणेश लक्ष्मी पूजन विधि:-

धन्वन्तरि पूजन के बाद गणेश लक्ष्मी जी की पंचोपचार पूजा की जाती है।
सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा की जाती है।पहले गणेश जी के आगे दीप प्रज्वल्लित करें।अब धूप दिखायें, उसके बाद इत्र समर्पित करें।भगवान को फूल समर्पित करें।अब गणेश जी को भोग लगायें। अंत में जल समर्पित करें।
इसी प्रकार से माँ लक्ष्मी की भी पंचोपचार विधि से पूजा करें ।

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