दशहरा क्यों मनाया जाता हैं और इसका क्या महत्व हैं |

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दशहरा क्यों मनाया जाता हैं और इसका क्या महत्व हैं

दशहरा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है | इसका आयोजन अश्विन मास की दशमी तिथि को किया जाता हैं |दशहरा संस्कृत के दस +हर से मिलकर बना हैं | जिसका शाब्दिक अर्थ हैं |दस बुराइयों से छुटकारा पाना |वे बुराइयां हैं – काम,क्रोथ,लोभ ,मोह,मद,मत्सर,अहंकार, हिंसा,चोरी, और आलस्य| दशहरा इन दस बुराइयों को त्यागने की प्रेरणा देता हैं | दशहरा के दिन ही शारदीय नवरात्रों में जो कलश व मूर्ति स्थापित की जाती हैं उसका विसर्जन भी आज ही के दिन करते हैं |

दशहरा मनाने के पीछे हिंदु धर्म की कुछ मान्यताएं हैं |

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प्रथम मान्यता 

ऐसा माना जाता हैं कि देवी दुर्गा ने महिषासुर राक्षस से 9 रात्रि व 10 दिनों तक  लगातार युद्ध करने के उपरांत आज ही के दिन महिषासुर राक्षस को मारकर विजय प्राप्त की थी | इसीलिए आज का दिन विजय दशमी या दशहरा के रूप में मनाया जाता है |

दूसरी  मान्यता 

इस मान्यता के अनुसार ऐसा माना जाता हैं कि राजा राम ने 10 दिनों तक रावण से लगातार युद्ध करने के बाद आज ही के दिन रावण को मारकर विजय प्राप्त की थी |इस विजय की खुशी में विजयदशमी या दशहरा का त्यौहार मनाया जाता हैं |

इस प्रकार दशहरा अनीति पर नीति की, बुराई पर अच्छाई की,असत्य पर सत्य की,अंधकार पर प्रकाश की विजय के रूप बहुत ही हर्ष व उल्लास के रूप में मनाया जाता हैं |

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अहंकार करने वालों के लिए दशहरा एक उदाहरण 

हर इंसान अपने जीवन में कभी न कभी अहंकार से प्रभावित जरुर होता हैं | उसे यह अहंकार अपनी सम्पति का, अपनी ताकत का, अपने बाहुबल का या अपनी बुद्धिमता का हो सकता हैं |क्योकि यह मानव का स्वभाव हैं | लेकिन दशहरा का पर्व हमें सिखाता हैं की रावण जैसा शक्तिशाली , बुद्धिमान व्यक्ति का भी अहंकार टूट जाता हैं फिर हम क्या चीज हैं |

अत: यह पर्व हमें अपनी बुराइयों को दूर कर नए सिरे से एक नया जीवन जीने की प्रेरणा देता हैं |

दशहरा का समाज में महत्व 

प्राचीन काल से ही ऐसी मान्यता हैं कि इस दिन शुरू किया गया कोई भी कार्य में सफलता अवश्य मिलती हैं | इसी लिए प्राचीन समय में राजा महाराजा लोग अपने अस्त्र -शास्त्रों की पूजा कर इसी दिन से अपना विजय अभियान शुरू करते थे |आज भी हम में से बहुत से लोग किसी बड़े काम का आरंभ दशहरा के दिन से करते हैं |

दशहरा पर कुछ कविताएँ 

1.

हर पल हो आपका जीवन सुनहरा |

घर आपके रहे सदा खुशियों का पहरा ||

रहें आप कहीं भी इस जहाँ में |

मुबारक हो आपको यह पवन पवित्र दशहरा ||

2.

आज दशहरे की घड़ी आई |

झूट पर सच की जीत हैं भाई ||

रामचंद्र ने रावण मारा |

तोड़ दिया अभिमान भी सारा ||

एक बुराई रोज हटाओ |

और दशहरा रोज मनाओ||

हार के भी वो जीता रावण |

मुक्ति पाई राम के चरनम ||

                                                                                                                                    –   गुलशन मदान

3.

बुराई पर अच्छाई की जीत |

झूट पर सच्चाई की जीत ||

अहम ना करो गुणों पर |

यही हैं इस दिवस की सीख ||

 

4.

फिर हमें सन्देश देने |

आ गया पवन दशहरा ||

संकटों का ताम घनेरा |

हो न आकुल ये मन ये तेरा ||

संकटों के तम छटेंगे |

होगा फिर सुंदर सवेरा ||

                                                                                   – सत्य् नारायण सिंह

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धन्यवाद 🙂

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