chhath puja vidhi 2017 in hindi| सम्पूर्ण छठ पूजा विधि 2017

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 सम्पूर्ण छठ पूजा विधि 2017

chhath puja vidhi 2017 in hindi

छठ पूजा भारत में भगवान सूर्य की उपासना का सबसे प्रसिद्ध हिंदू त्‍योहार है। इस त्‍योहार को षष्ठी तिथि पर मनाया जाता है, जिस कारण इसे सूर्य षष्ठी व्रत या छठ कहा गया है।शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि सूर्य देव की पूजा से आयु, बुद्धि, बल और तेज की प्राप्ति होती है। इसके अलावे पुत्र प्राप्ति और संतान संबंधी समस्या के समाधन के लिए सूर्य की उपासना करना श्रेष्ठ माना गया है। यह त्‍योहार एक साल में दो बार मनाया जाता है- पहली बार चैत्र महीने में और दूसरी बार कार्तिक महीने में।

2017 छठ पूजा की शुभ मुहर्त  :

मंगलवार,24 अक्टूबर 2017 , सुबह स्नान पूजा और खाने का दिन है।

बुद्धवार, 25 अक्टूबर , 2017 उपवास का प्रथम दिन है जिसे खरना कहते है।

गुरुवार, 26 अक्टूबर , 2017 उपवास का दूसरा दिन संध्या अर्घ्य का दिन है।

शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2017 सूर्योदय अर्घ्य और उपवास के खोलने का दिन है।

छठ की पूजा में  विधि-विधान को  बहुत महत्व दिया गया है। इन विधि-विधानों में पूजन सामग्री विशेष महत्व है साथ ही इन सामग्री के बिना छठ पूजा अधूरा माना गया है।

अवश्य पढ़े: छठ पूजा का महत्व और कथा । 

छठ पूजन की सामग्री(Chhath Pujan Samagri) :

बॉस या पितल की सूप, बॉस के फट्टे से बने दौरा व डलिया, पानी वाला नारियल, गन्ना पत्तो के साथ, सुथनी,    शकरकंदी,  डगरा, हल्दी और अदरक का पौधा, नाशपाती, नींबू बड़ा,  शहद की डिब्बी, पान सुपारी, कैराव,  सिंदूर,  कपूर,    कुमकुम, चावल अक्षत के लिए, चन्दन और इसके अलावा घर पे बने हुवे पकवान जैसे खस्ता, पुवा, ठेकुवा जिसे कुछ क्षेत्रों में टिकरी भी कहते हैं, इसके अलावा चावल के लड्डू, जिसे लड़ुआ भी कहा जाता है, इत्यादि छठ पूजन के सामग्री में शामिल है ।

छठ व्रत विधि (Chhath Vrat Vidhi in Hindi) :

छठ पूजा की चार दिन तक महापर्व हैं। इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्थी से होती है तथा समाप्ति कार्तिक शुक्ल पक्ष सप्तमी को होती है। इस दौरान व्रत करने वाले ब्रतधारी लगातार 36 घंटे का व्रत रखते हैं। इस दौरान वे निर्जला रहते है और कुछ भी ग्रहण  नहीं करते है।

1.प्रथम चरण खाए नहाय :

छठ पूजा व्रत चार दिन तक चलता है। इसके पहले दिन नहा खा की विधि से शुरू होती है। जिसमें ब्रतधारी को घर की सफाई कर एवं स्वयं शुद्ध होना चाहिए तथा केवल शुद्ध लौकी की सब्जी, चावल, दाल और रोटी की भोजन ही करना चाहिए।

2. दूसरा चरण खरना :

इसके दूसरे दिन खरना की विधि होती है। खरना के दिन व्रतधारी को पूरे दिन का निर्जला उपवास रखकर, शाम के समय गन्ने का रस या गुड़ में बने हुए चावल की खीर और शुध्य आते की रोटी साथ में शुद्ध घी लगाकर प्रसाद के रूप में खाना चाहिए। इस दिन बनी गुड़ की खीर बेहद पौष्टिक और स्वादिष्ठ होती है और इसे सभी लोगो में बाटकर प्रसाद के रूप में खानी चाहिए|

3.तीसरा चरण शाम का अर्घ्य : 

छठ पूजा के तीसरे दिन सूर्य षष्ठी को पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर शाम के समय डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पूजा की सामग्रियों को लकड़ी या बास के डाले में रखकर नदी या तालाब के घाट पर ले जाना चाहिए और वहा जल में खड़े होकर पूजा करनी चहिये। शाम को सूर्य को अर्घ्य देने के बाद घर आकर सारा सामान वैसी ही रखना चाहिए। इस दिन रात के समय छठी माता की गीत गाई जाती है और घर में भी कोशी भरते है और पूजा किया जाता है साथ ही व्रत कथा सुननी चाहिए।

4. चोथा चरण सुबह का अर्घ्य :

छठ पूजा के चौथे दिन सुबह-सुबह सूर्य निकलने से पहले ही नदी या तालाब के घाट पर पहुंचना चाहिए। उगते हुए सूर्य की पहली किरण को जल में खरे होकर अर्घ्य देना चाहिए। इसके बाद घाट पर छठ माता को प्रणाम कर उनसे संतान-रक्षा और अपनी कोई मनोकामना हो तो मांगना चाहिए। अर्घ्य देने के बाद घर लौटकर सभी में प्रसाद वितरण करना चाहिए तथा स्वयं भी प्रसाद खाकर व्रत खोलना चाहिए।

अर्घ्य देते समय ध्यान रखने वाली बातें 

# पीतल व तांबे के पात्रों से ही अर्घ्य दे।

# पीतल के पात्र से दूध का अर्घ्य देना चाहिए।

# चांदी और स्टील के पात्रों से अर्घ्य नहीं देना चाहिए।

# शीशे व् प्लास्टिक के पात्रों से भी अर्घ्य नहीं देना चाहिए।

# तांबे के पात्र में दूध से कभी अर्घ्य न दें ।

छठ पूजा के नियम-Rule of Chhath Puja

छठ पूजा करने वाले व्रती को कई कड़े नियमों का पालन करना पड़ता  है। आइये जानते हैं छठ पर्व से सम्बन्धित नियमों को –

# छठ व्रत में साफ-सुथरे व नए व बिना सिलाई के कपडे पहने जाते है। महिलायें साडी और पुरुष धोती पहन सकते है।

# इस चार दिनों में व्रत करने वाला व्रती धरती पर सोता है। जिसके लिए कम्बल और चटाई का प्रयोग कर सकता है।

# इन दिनों घर में प्याज. लहसुन और मांस का प्रयोग पूर्णत: वर्जित होता है।

# छठ पूजा के बीच में या यह पर्व आने वाला हो तव किसी करीबी या रिश्तेदार का मृत्यु हो जाये तो उस वर्ष इस व्रत को नही रखना चाहिए।

# इस पवित्र पर्व पर क्रोध, मोह, लोभ और काम को त्यागकर सुगम व सात्विक आचरण करना चाहिए।

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