महान सेनानायक नेपोलियन बोनापार्ट के प्रेरक प्रसंग

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महानता के गुण बचपन से ही दिखाई देने लगते है . इस कहानी में भी इतिहास के एक प्रसिद्ध व्यक्ति के बारे में पढ़ेंगे.

प्रेरक प्रसंग-1

बहुत समय पहले की बात है . एक लड़का और एक लड़की एक बड़े बगीचे में खेल रहे थे .खेलते – खेलते वे दोनों काफी दूर निकल गए .

बगीचे की पगडण्डी से एक किसान  की लड़की पके फलों की टोकरी लेकर जा रही थी . उन दोनों की असावधानी से किसान की लड़की की टोकरी गिर गई और सारे फल गिर कर ख़राब हो गए . यह देखकर किसान की लड़की रोने लगी .

यह देखकर लड़की बोली भाई इससे पहले कोई और देखे – चलो भाग चले .

लड़के ने कहा – ‘ मैं नहीं जाऊंगा . हमने उसका बहुत नुकसान कर दिया हैं , हमें उस नुकसान की भरपाई करनीचाहिये है .’

यह कहकर वह किसान की लड़की की पास गया और जो फल ठीक थे उन्हें बीनने में उसकी सहायता करने लगा .

किसान बालिका ने कहा- ‘अब मेरे परिवार  भूखा रहना पड़ेगा क्योंकि इन फलों को बाजार में बेचकर जो धन मिलता हैं उसी से खाने का सामान खरीदती हूँ .’

लड़के ने कहा – तुम रोओ मत , मेरे साथ मेरे घर चलो में अपनी माँ से तुम्हे तुम्हारे फलों की पूरी कीमत दिला दूंगा .

लड़का किसान लड़की को लेकर माँ के पास जाता है और माँ को सारी बात बताता है

माँ उसे डाटती है और कहती है की जब उसने मना किया था तो वो बगीचे में क्यों गया . लड़का माफ़ी मांगता है और भविष्य में दोबारा ऐसा न करने का आश्वासन देता है .

माँ लड़के की सच्चाई से प्रभावित होकर उसे माफ़ कर देती है .

तब लड़का कहता है माँ आप मुझे महीने के खर्च के जो पैसे देती हो उन पैसो से इस किसान लड़की के फलों का मूल्य चूका दो .

इस प्रकार किसान की लड़की को पूरा दाम मिल जाता है और वह खुस होकर अपने घर चली जाती हैं .

DOSTO यही बालक बड़ा होकर नेपोलियन बोनापार्ट बना . जिसका नाम आज भी पूरी दुनिया में सम्मान से लिया जाता हैं

प्रेरक प्रसंग-2

एक बार एक चित्रकार नेपोलियन से मिलने गया . नेपोलियन ने उस चित्रकार को मैले -कुचैले कपड़े पहने देखकर उसका आदर नहीं किया .उसे दूर एक ओर बैठने का आदेश दिया . थोड़ी देर बाद उस चित्रकार ने नेपोलियन से उनका एक चित्र बनवाने का आग्रह किया . नेपोलियन उसके दुवारा बनाये गए चित्र को देखकर आश्चर्य चकित रह गया .

थोड़ी देर बाद जब वह चित्रकार जाने लगा तो नेपोलियन ने स्वयं उठकर उससे हाथ मिलाया .साथ ही उसे आदर से दरवाजे तक छोड़ने भी गया .इस प्रकार का आदर -सत्कार पाकर चित्रकार को बहुत आश्चर्य हुआ .

उसने डरते हुए नेपोलियन से पूछा ,’ जब मैं यहाँ आया था तब तो आपने मुझे अपने पास बैठने तक  नहीं दिया  और जाते समय मुझे दरवाजे तक छोड़ने आए . इसका क्या कारण है ?’.

नेपोलियन ने मुस्कराते हुए कहा की आते समय जो आदर किया जाता है , वह मनुष्य की पोशाक देखकर. लेकिन जाते समय आदर किया जाता है उसके गुणों को पहचान कर. इसलिए मैंने ऐसा किया . यह उत्तर पाकर वः चित्रकार नेपोलियन की विद्धता देखकर भाव विभोर हो गया .

 

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