जार्ज वाशिंगटन के प्रेरक प्रसंग

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1-समय के पाबंद

अमेरिका के प्रथम राष्ट्रपति जार्ज वाशिंगटन ने एक बार कुछ मेहमानों को दोपहर के भोजन के लिए कुछ मेहमानों को आमंत्रित किया . भोजन के बाद उन्हें सैनिक कमांडरो कि एक बैठक मैं भाग लेना था .

उनका नौकर जानता था कि जार्ज वाशिंगटन समय कि पाबंद हैं अत: भोजन ठीक समय पर लगाने का प्रबंध कर दिया गया . भोजन लगने पर उसने जार्ज वाशिंगटन को भोजन लगने कि सूचना दे दी .

समय हो चूका था पर अब तक कोई मेहमान नहीं आया था . वो भोजन कक्ष  आये और कहा ,’ बाकी सभी प्लेंटे उठा लो , हम अकेले ही भोजन करेंगे .’

उन्होंने मेहमानों के आने कि प्रतीक्षा करे बगैर ही भोजन शुरू कर किया और जब वे आधा भोजन कर चुके तब मेहमान पहुंचे , तब मेहमानों कि प्लेंटे लगाई गई .

पर वाशिंगटन ने अपना भोजन समाप्त किया और निश्चत समय पर विदा लेकर बैठक में शामिल होने चले गये .

सैनिक कमांडरोकी बैठक में पहुँचने पर पता चला कि अमेरिका के एक भाग में भयंकर विद्रोह हो गया हैं . उनके समय पर पहुँचने के कारण तत्काल आवश्यक आदेश जारी किये गये और सभी पहलुओं पर विचार कर हालत संभालने के उपाय किये गये .

इस प्रकार एक बहुत बड़ी जन -धन कि हानि होने से बचना संभव हो सका . इस बात का पता कुछ समय बाद उन मेहमानों लो चला तो उन्हें बहुत आत्मग्लानि हुई .

उन्होंने अनुभव किया कि प्रत्येक कार्य को निश्चित समय पर करने से भयंकर हानियों को रोका जा सकता है और जीवन को सुचारू रूप से चलाया जा सकता हैं .

यही सोच कर वे सभी फिर राष्ट्रपति के घर गये और उनसे उस दिन हुई भूल कि माफ़ी मांगी . राष्ट्रपति ने कहा कि इसमें क्षमा जैसी कोई बात नहीं हैं  पर जिन्हें अपने जीवन मैं व्यवस्था , परिवार , समाज और देश कि उन्नति का ध्यान हो उन्हें समय का कड़ाई से पालन करना चाहिए .

 

अब्राहम लिंकन के प्रेरक प्रसंग

( पढ़ने के लिए लिंक पर click करें)

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