फ़िराक गोरखपुरी की चुनिन्दा शायरी Best shayari of Firaq Gorakhpuri

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Best shayari of Firaq Gorakhpuri
Best shayari of Firaq Gorakhpuri

Best shayari of Firaq Gorakhpuri .फ़िराक गोरखपुरी का जन्म 18 अगस्त 1896 को गोरखपुर के एक कायस्थ परिवार में हुआ था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा अरबी,फारसी और अंग्रेजी में हुई थी। इनका मूल नाम रघुपति सहाय था। 

** 1**

जो उलझी थी कभी आदम के हाथों
वो गुत्थी आज तक सुलझा रहा हूँ

** 2**

हज़ार बार ज़माना इधर से गुज़रा है
नई नई सी है कुछ तेरी रहगुज़र फिर भी

** 3**

अब तो उन की याद भी आती नहीं
कितनी तन्हा हो गईं तन्हाइयाँ

** 4**

आए थे हँसते खेलते मय-ख़ाने में ‘फ़िराक़’
जब पी चुके शराब तो संजीदा हो गए

** 5**

कौन ये ले रहा है अंगड़ाई
आसमानों को नींद आती है

** 6**

कोई समझे तो एक बात कहूँ
इश्क़ तौफ़ीक़* है गुनाह नहीं

** 7**

मैं हूँ दिल है तन्हाई है
तुम भी होते अच्छा होता

** 8**

न कोई वादा न कोई यक़ीं न कोई उम्मीद
मगर हमें तो तिरा इंतिज़ार करना था

** 9**

मौत का भी इलाज हो शायद
ज़िंदगी का कोई इलाज नहीं

** 10**

मैं देर तक तुझे ख़ुद ही न रोकता लेकिन
तू जिस अदा से उठा है उसी का रोना है

** 11**

मुद्दतें गुज़रीं तिरी याद भी आई न हमें
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं

** 12**

तेरे आने की क्या उमीद मगर
कैसे कह दूँ कि इंतिज़ार नहीं

** 13**

साँस लेती है वो ज़मीन फ़िराक़
जिस पे वो नाज़ से गुज़रते हैं

** 14**

तबीअत अपनी घबराती है जब सुनसान रातों में
हम ऐसे में तिरी यादों की चादर तान लेते हैं

** 15**

तुझ को पा कर भी न कम हो सकी बे-ताबी-ए-दिल
इतना आसान तिरे इश्क़ का ग़म था ही नहीं

** 16**

बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं
तुझे ऐ ज़िंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं

** 17**

ग़रज़ कि काट दिए ज़िंदगी के दिन ऐ दोस्त
वो तेरी याद में हों या तुझे भुलाने में

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