वीर बालक रामसिंह राठौर : जिसने शाहजहाँ की सत्ता को चुनौती दी |

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वीर बालक रामसिंह  राठौर 

ये सच्ची घटना वीर बालक रामसिंह राठौर की हैं |राठौर सामंत अमर सिंह शाहजहाँ के दरबार में उच्च पद के सरदार थे | एक दिन बादशाह के साले सलावत खां ने उनका अपमान भरे दरबार में कर दिया |वीर अमर सिंह यह अपमान सह नही सके उन्होंने भरे दरबार में ही सलावत खां का सिर धड़ से अलग कर दिया | दरबार में हलचल मच गई| दरबारी इधर – उधर भागने लगे | किसी में भी इतना साहस नही था जो अमरसिंह को रोक सके | इसके बाद अमर सिंह घर वापस चले गए |

अमर सिंह का एक साला था जिसका नाम अर्जुन गौड़ था | वह बहुत ही धूर्त , नीच व् लालची स्वभाव का व्यक्ति था |बादशाह शाहजहाँ उसके व्यक्तित्व के बारे में जानता था |उसने अर्जुन गौड़ को बुला भेजा और उसे धन का लालच देकर अपनी ओर मिला लिया |अर्जुन गौड़ अमर सिंह के पास गया और उसे समझा – बुझाकर बादशाह के महल में ले गया |वहाँ अमर सिंह जब एक छोटे से दरवाजे से होकर भीतर जा रहे थे तो उसने धोखे से अमर सिंह पर वार कर उसे मार दिया |

बादशाह शाहजहाँ इससे बहुत प्रसन्न हुआ | उसने अमर सिंह की लाश को किले की बुर्ज पर डलवा दिया | इस प्रकार एक वीर योद्धा की लाश चील -कौवा को खाने के लिए डाल डी गई |

अमर सिंह की पत्नी ने जब यह समाचार सुना तो उसने सती होने का निश्चय किया पर बिना पति की लाश के उसका सती होना भी संभव नही था |अमर सिंह की पत्नी के पास जो भी थोड़े से राजपूत सैनिक थे उन्हें अमर सिंह की लाश लेने के लिए भेजा पर उनकी संख्या बहुत कम थी | वे अमर सिंह की लाश लाने में सफल नहीं हो सके और लड़ते – लड़ते वीर गति को प्राप्त हो गए |

अमर सिंह की पत्नी ने अन्य सरदारों से मदद मांगी पर कोई भी बादशाह के डर से उसकी मदद के लिए तैयार नही हुआ |तब उसने स्वम ही पति की लाश लाने का निर्णय लिया | उसने अपनी तलवार और घोडा मंगाया | उसी समय अमर सिंह को भतीजा रामसिंह राठौर वहाँ आया और बोला -चाची आप रुको में चाचा की लाश लेने जा रहा हूँ या तो में चाचा की लाश लेकर आऊंगा या मेरी भी लाश  वहाँ गिरेगी |

रामसिंह राठौर उस समय 15 वर्ष का एक नव युवक था जो अमर सिंह के बड़े  भाई जसवंत सिंह का पुत्र था |रामसिंह राठौर घोड़ा दौडाते-दौडाते महल के अन्दर पहुँच गया | इतने महल के रक्षक समझते इतने वह बुर्ज के नीचे पहुँच गया | उसे सैकड़ों सैनिकों ने घेर लिया उसने उन सभी से लड़ते – लड़ते वह भी खून से लतपथ हो गया |उन सभी को मारता हुआ वह बुर्ज तक पहुँच गया उसने अपने चाचा की लाश कंधे पर रक्खी और और तलवार चलाता हुआ नीचे चला आया | इससे पहले की और सेना आती वह किले का फाटक पर कर गया |

रानी अपनी चिता के पास खडी होकर रामसिंह राठौर का इंतजार कर रही थी | पति की लाश पाकर रानी ने रामसिंह राठौर को बहुत आशीर्वाद दिया और सती हो गई |

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