महान स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक के जीवन का प्रेरक प्रसंग

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महान स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक के जीवन का प्रेरक प्रसंग/Bal Gangadhar Tilak in hindi

बाल गंगाधर तिलक एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे | अंग्रजी राज का विरोध करने के कारण  तत्कालीन सरकार ने उन्हें मांडले कारागृह में छह साल के लिए भेज दिया |

दुःख और यातना सहते -सहते छह साल में शरीर को तमाम तरह की बीमारियों ने घेर लिया था | तभी उन्हें पत्नि की मृत्यु की सुचना मिली |

सूचना मिलते ही उन्होंने अपने एक मित्र को पत्र लिखा कि खबर जानकर मन को धक्का लगा है | मैं थोडा उदास हो गया हूं | मैं उस समय वहां उसके करीब नहीं था , इसका बहुत अफ़सोस हैं |

पर होनी को कौन टाल सकता है ? परन्तु मैं अपने दुःख भरे विचार सुनाकर आप सब को ओर दुखी नहीं करना चाहता हूं | मेरी गैर मोजूदगी में बच्चों को ज्यादा दुःख होना स्वभाविक हैं | उन्हें मेरा सन्देश पहुंचा दीजिये कि जो होना था वो हो चुका हैं | इस दुःख में अपनी और हानि न होने दे , पढ़ने में ध्यान दे , विद्या ग्रहण करने में कोई कसर न छोड़ें |

मेरे माता- पिता के देहांत के समय मैं उनसे भी कम उम्र का था | संकटों के वजह से ही स्वावलंबी बनने में सहायता मिलती हैं | दुःख करने में समय का दुरूपयोग होता हैं | जो हुआ हैं , उस परिस्थति का धीरजपूर्वक सामना करें |

पत्नि के निधन का समाचार बहुत दुखद था , किन्तु बाल गंगाधर तिलक ने अपना धीरज न खोते हुए परिजनों  को धैर्य बंधाया और उनसे दूर रहते हुए भी उन्हें संबल दिया |

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