अकबर इलाहाबादी  शायरी| Akbar Allahabadi shayari

0
869

Akbar Allahabadi shayari

अकबर इलाहाबादी  शायरी| Akbar Allahabadi shayari

(अकबर इलाहाबादी उर्दू में हास्य-व्यंग के सबसे बड़े शायर , इलाहाबाद में सेशन जज थे।)

 

(1)

हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम
वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता

(2)

आई होगी किसी को हिज्र में मौत
मुझ को तो नींद भी नहीं आती

हिज्र = जुदाई

(3)

दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ
बाज़ार से गुज़रा हूँ ख़रीदार नहीं हूँ

(4)

हर ज़र्रा चमकता है अनवार-ए-इलाही से
हर साँस ये कहती है हम हैं तो ख़ुदा भी है

जर्रा  =  कण,  अनवार-ए-इलाही  =  भगवान की रौशनी

(5)

हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना
हसीनों को भी कितना सहल है बिजली गिरा देना

सहल = सरल

(6)

जो कहा मैं ने कि प्यार आता है मुझ को तुम पर
हँस के कहने लगा और आप को आता क्या है

(7)

जो कहा मैं ने कि प्यार आता है मुझ को तुम पर
हँस के कहने लगा और आप को आता क्या है

(8)

जब ग़म हुआ चढ़ा लीं दो बोतलें इकट्ठी
मुल्ला की दौड़ मस्जिद ‘अकबर’ की दौड़ भट्टी

(9)

जवानी की दुआ लड़कों को ना-हक़ लोग देते हैं
यही लड़के मिटाते हैं जवानी को जवाँ हो कर

(10)

नाज़ क्या इस पे जो बदला है ज़माने ने तुम्हें
मर्द हैं वो जो ज़माने को बदल देते हैं

(11)

रहता है इबादत में हमें मौत का खटका
हम याद-ए-ख़ुदा करते हैं कर ले न ख़ुदा याद

(12)

तअल्लुक़ आशिक़माशूक़ का तो लुत्फ़ रखता था
मज़े अब वो कहाँ बाक़ी रहे बीवी मियाँ हो कर

तअल्लुक़  =  सम्बन्ध,  आशिक़  =  प्रेमी,  माशूक़  =  प्रेमिका

(13)

रक़ीबों ने रपट लिखवाई है जा जा के थाने में
कि ‘अकबर’ नाम लेता है ख़ुदा का इस ज़माने में

(14)

ये दिलबरी ये नाज़ ये अंदाज़ ये जमाल
इंसाँ करे अगर न तिरी चाह क्या करे

(15)

ये है कि झुकाता है मुख़ालिफ़ की भी गर्दन
सुन लो कि कोई शय नहीं एहसान से बेहतर

मुखालिफ =  दुशमन, विरोधी

(15)

खींचो न कमानों को न तलवार निकालो
जब तोप मुक़ाबिल हो तो अख़बार निकालो

(16)

किस नाज़ से कहते हैं वो झुंजला के शब-ए-वस्ल
तुम तो हमें करवट भी बदलने नहीं देते

शब-ए-वस्ल  =   मिलन की रात

(17)

क्या वो ख़्वाहिश कि जिसे दिल भी समझता हो हक़ीर
आरज़ू वो है जो सीने में रहे नाज़ के साथ

हक़ीर  =  नीच, घृणित
आरजू   =  तमन्ना

(18)

हुए इस क़दर मोहज़्ज़ब कभी घर का मुँह न देखा
कटी उम्र होटलों में मरे अस्पताल जा कर

मोहज़्ज़ब  =  सभ्य

अवश्य पढ़े- मिर्जा ग़ालिब की शायरी| Mirza Galib ki shayari

(19)

जब मैं कहता हूँ कि या अल्लाह मेरा हाल देख
हुक्म होता है कि अपना नामा-ए-आमाल देख

(20)

इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है बेहद
अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता

प्रमुख शायरों की शायरी यहाँ पढ़े –

—————————————————————

दोस्तों यदि आपके पास अकबर इलाहाबादी  शायरी| Akbar Allahabadi shayari में ओर जानकारी हैं, या हमारे द्वारा दी गई जानकारी में कुछ त्रुटी लगे या कोई सुझाव हो तो comment करके सुझाव हमें अवश्य दें |हम इस पोस्ट को update करते रहेंगें |

दोस्तों यदि आपको हमारी पोस्ट अच्छी लगी हो तो उसे like और share अवश्य करें |

धन्यवाद 🙂

अन्य हिंदी प्रेरक कहानियां यहाँ पढ़े

  1. लड़ती बकरियां और सियार /Fighting goats and The jackal
  2. दुष्ट कोबरा और  कौए / The Cobra and The crow
  3. बगुला और केकड़ा / The Crane & The crab , A panchtantra tale
  4. वीर बालक बादल: जिसका राजपुताना सदैव ऋणी रहेगा |
  5. वीर बालक रामसिंह राठौर : जिसने शाहजहाँ की सत्ता को चुनौती दी |
  6. Rolls royce से कूड़ा – करकट उठवाने वाला  एक भारतीय राजा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here