अब्राहम लिंकन के  चार प्रेरक प्रसंग

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Abraham Linkon in hindi

अब्राहम लिंकन के जीवन के प्रेरक प्रसंग /Abraham Linkon in hindi

1-प्रेरक प्रसंग

एक दिन अब्राहम लिंकन(Abraham Linkon) अपने मित्रों के साथ शाम को टहलकर वापस अपने घर को लौट रहे थे। तभी उन्होंने देखा की सामने से एक घोड़ा चला आ रहा था। उस की पीठ पर जीन कसी हुई थी।, लेकिन उस घोड़े पर कोई सवार नहीं था।

घोड़े को देखकर अब्राहिम ने कहा कि – पता नहीँ किसका घोडा हैं ? पता नहीँ घोड़े का मालिक कहा हैं।”

मित्रों ने कहा कि- किसी शराबी का होगा। और वह नशे में कहीं पड़ा होगा।”

अब्राहम बोलें – “ हमें उसकी खोज करनी चाहिए ‘  रात्रि होने वाली हैं कोई जंगली जानवर उसे नुकसान पहुँचा सकता हैं।”
मित्र नाराज होने लगे और झल्ला कर बोले – ” रात्रि होने वाली हैं और तुम्हें एक शराबी  को खोजने की पड़ी हैं।”
 
लेकिन अब्राहम बचपन से ही बहुत ही दयालु थे , वे किसी को भी संकट में नहीं देख सकते थे।
अब्राहम ने कहा – ” वह शराबी हैं तो क्या हुआ हैं तो मनुष्य ही ”
 उसे हमारी सहायता की आवश्यकता हैं  और हमें उसकी सहायता करनी चाहिये।
मित्र नाराज होकर बोले – केवल तुम ही मनुष्य हो हम तो जैसे मनुष्य ही नहीं हैं , अपनी मनुष्यता अपने पास रखो , हम तो अपने घर जा रहे हैं “|
यह कहकर सभी मित्र अपने -अपने घर चले गए। लेकिन अब्राहम अकेला ही घोड़े के सवार को ढूँढने निकल पड़ा। कुछ दूर जाने के बाद उसे रस्ते के किनारे एक बेहोश पड़ा शराबी मिला। जिसने इतनी शराब पी रखी थी कि अब्राहम के हिलाने -डुलाने पर भी होश में नहीं आया।
अब्राहम उसे किसी तरह से उसे घर लाया तो अब्राहम की बहिन नाराज होने लगी तो वह बोला कि –‘ बहिन ! यह मनुष्य हैं इसे हमारी आवश्यकता थी अतः इसकी सेवा करना हमारा कर्तव्य हैं। “
अब्राहम ने उस शराबी को नहलाया , उसके कपड़े बदले  और होश आने पर उसे भोजन खिलाया। सुबह होने पर शराबी ने अब्राहम को बहुत – बहुत धन्यवाद दिया और अपने घर चला गया।
Dosto यही अब्राहम लिंकन अपने इन्हीं सद्गुणों के कारण बड़े होकर अमेरिका के राष्ट्रपति बने। आज भी लोग उनका नाम ‘पिता लिंकन ‘  बड़ी श्रद्धा से लेते हैं।  
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2-प्रेरक प्रसंग

क्रोध पर विजय पाने का अद्भुत प्रयोग

यह प्रसंग उस समय का है जब अब्राहम लिंकन अमेरिका के राष्ट्रपति थे | अमेरिका के तत्कालीन रक्षामंत्री ने सेना के एक प्रमुख अधिकारी को एक आदेश भेजा जिसे उस अधिकारी ने समझने में भूल कर दी |जब रक्षा मंत्री को यह बात पता चली तो वो बहुत क्रोधित हो गये |

अब्राहम लिंकन ने जब इस विषय मे पूछा तो रक्षामंत्री ने उन्हें विस्तार से जानकारी देते हुए कहा – ‘ देखिये , उस जनरल ने मेरे आदेश की अवमानना की है . मै उसे इस बात के लिए कठोर पत्र लिखूंगा .’

तब राष्ट्रपति लिंकन ने कहा , ‘ ठीक है आप पत्र लिखिए और उस पत्र मे कठोरतम शब्दों का प्रयोग कीजिये .’

इस तरह रक्षा मंत्री ने सेना अधिकारी को कठोर व् चेतावनी पत्र लिखा | जब पत्र पूरा हो गया तो रक्षामंत्री  उसे राष्ट्रपति लिंकन की पास ले गए |

रक्षामंत्री की ओर देखे बिना ही राष्ट्रपति ने कहा , ‘ ठीक हैं  , अब इस पत्र को फाड़कर फेंक दीजिये ‘|

ऐसे पत्र को भेजने का कोई औचित्य नहीं है | मै भी यही करता हूँ . जब मै आवेशपूर्ण स्थिति मे होता हूँ तो पत्र लिखता हूँ| फिर उसे फाड़ देता हूँ | ऐसे में मैं अपने क्रोध पर काबू पा लेता हूँ | रक्षामंत्री स्तब्ध रह गया |

Dosto क्रोध की अग्नि बुद्धि और विवेक को जला देती है | इसलिये जब भी क्रोध आए तो राष्ट्रपति लिंकन की विधि अपनाएं और क्रोध पर विजय पा लें, क्योकिं क्रोध तो क्षणिक होता हैं क्रोध में उठाया हुआ कोई भी कदम बाद में पछतावे के अलावा कुछ नहीं छोडता|

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3-प्रेरक प्रसंग

अब्राहम (Abraham Linkon) एक गरीब मजदूर का पुत्र था| उसे पढ़ने का बहुत शौक था | उसे कही से पता चला कि उसके शिक्षक एंड्रू क्रांफर्ड के पास जार्ज वाशिंगटन कि जीवनी हैं |

अब्राहम का मन उसे पढ़ने दे लिए लालायित हो उठा  तो उन्होंने मि० क्रांफर्ड से पुस्तक उधार देने कि प्रार्थना की| मि० क्रांफर्ड ने उसके पुस्तक प्रेम को देखते हुए पुस्तक उसे दे दी |

घर जाते ही अब्राहम पुस्तक पढ़ने बैठ गए और पढ़ते -पढ़ते ही उसकी आँख लग गई | जब सुबह वह जागा तो उसका ह्रदय यह देखकर धक् रह गया कि रात को बारिश कि बौछार आने से पुस्तक ख़राब हो गई हैं|

वह दुखित ह्रदय से पुस्तक लेकर मि० क्रांफर्ड के पास पहुँचा | पुस्तक कि दुर्गति देखकर वे अब्राहम पर बरस पड़े और बोले -‘  तुमने अपनी लापरवाही से इतनी कीमती पुस्तक ख़राब कर दी इसीलिए मैं यह पुस्तक किसी को नहीं देता था | अब तो इस पुस्तक कि कीमत भरो या तीन दिनों तक  मेरे खेत पर काम करो , यह पुस्तक तुम्हारी हो जाएगी |’

पैसे तो अब्राहम के पास नही थे , पर उसने तीन दिन तक मि० क्रांफर्ड  के खेत पर जी – तोड़ मेहनत की| परिणाम स्वरूप पुस्तक मिलने पर वह ख़ुशी से झूमता हुआ घर पंहुचा और अपने पिता को वचन देता हुआ बोला कि मैं एक दिन वाशिंगटन की तरह बनकर दिखाऊंगा |

Dosto यही बालक एक दिन अमेरिका का राष्ट्रपति बना .

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4-प्रेरक प्रसंग

लोकतंत्र के महान समर्थक अब्राहम लिंकन(Abraham Linkon) एक बार अपने गाँव के नजदीक एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे | भाषण के बीच में एक महिला उनके सामने आकर खड़ी होकर बोली , ‘अरे यह राष्ट्रपति हैं ? यह तो हमारे गाँव के मोची का लड़का हैं |’

अपने प्रति ऐसे शब्द सुनकर लिंकन ने बड़ी विनम्र शब्दों में उस महिला से कहा, ‘मैडम आपने बहुत अच्छा किया जो यहाँ उपस्थित जनता को मेरे जीवन की सच्चाई के बारे में बता दिया |

में वहीं मोची का बेटा हूँ | क्या आपसे एक बात पूंछ सकता हूँ ?

‘अवश्य’ उस महिला ने कहा | तब अब्राहम लिंकन ने पूंछा ,’ क्या मेरे पिताजी ने आपके जूते तो ठीक से मरम्मत किये थे न ? | आपको उनके काम में कोई शिकायत तो नहीं मिली थी |

उस महिला ने सफाई देते हुए कहा कि नहीं -नहीं उनके कार्य में कोई भी शिकायत नहीं मिली | वे अपना काम बहुत अच्छी तरह से करते थे |

तब अब्राहम लिंकन  ने उत्तर दिया मैडम,’ जिस प्रकार मेरे पिताजी ने अपने कार्य में कोई शिकायत का मौका नहीं दिया, उसी प्रकार में भी आपको आश्वस्त करता हूँ कि आपने मुझे राष्ट्र्पति के रूप में कार्य करने का जो मौका दिया हैं , उसे में बड़ी कुशलता से करूंगा और मेरी यह कोशिश रहेगी कि मेरे काम में आपको कोई शिकायत का मौका न मिले |

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